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आखिर द्रौपदी की साड़ी इतनी लंबी कैसे हो गई?

Updated: मंगलवार, 12 जून 2018 (17:09 IST)
बहुत से लोग कहते हैं कि द्युतक्रीड़ा में द्रौपदी को हारने के बाद जब उनका चीरहरण हो रहा था तब उसी वक्त श्रीकृष्ण आ गए और उन्होंने इस घटना को रोक दिया। उन्होंने किसी चमत्कार से ऐसा नहीं किया। लेकिन ऐसा कहने वाले न तो श्रीकृष्ण को जानते हैं और न ही महाभारत को।
महाभारत में द्युतक्रीड़ा के समय युद्धिष्ठिर ने द्रौपदी को दांव पर लगा दिया और दुर्योधन की ओर से मामा शकुनि ने द्रोपदी को जीत लिया। उस समय दुशासन द्रौपदी को बालों से पकड़कर घसीटते हुए सभा में ले आया।
 
जब वहां द्रौपदी का अपमान हो रहा था तब भीष्मपितामह, द्रोणाचार्य और विदुर जैसे न्यायकर्ता और महान लोग भी बैठे थे लेकिन वहां मौजूद सभी बड़े दिग्गज मुंह झुकाएं बैठे रह गए। इन सभी को उनके मौन रहने का दंड भी मिला। 
 
लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर द्रौपदी की साड़ी इतनी लंबी कैसे हो गई कि उसे खींचते-खींचते दुशासन हार गया।
 
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देखते ही देखते दुर्योधन के आदेश पर दुशासन ने पूरी सभा के सामने ही द्रौपदी की साड़ी उतारना शुरू कर दी। सभी मौन थे, पांडव भी द्रोपदी की लाज बचाने में असमर्थ हो गए। तब द्रोपदी ने आंखें बंद कर वासुदेव श्रीकृष्ण का आव्हान किया।

द्रौपदी ने कहा, ''हे गोविंद आज आस्था और अनास्था के बीच जंग है। आज मुझे देखना है कि ईश्वर है कि नहीं''... तब श्रीहरि श्रीकृष्ण ने सभी के समक्ष एक चमत्कार प्रस्तुत किया और द्रौपदी की साड़ी तब तक लंबी होती गई जब तक की दुशासन बेहोश नहीं हो गया और सभी सन्न नहीं रह गए। सभी को समझ में आ गया कि यह चमत्कार है।
 
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श्रीकृष्ण द्वारा द्रौपदी की लाज बचाने के पीछे दो कारण थे। पहला यह कि वह उनकी सखी थीं और दूसरा यह कि उसने दो पुण्य कार्य किए थे।
 
पहला पुण्य कार्य : वह पुण्य कर्म यह था कि एक बार द्रौपदी गंगा में स्नान कर रही थी उसी समय एक साधु वहां स्नान करने आया। स्नान करते समय साधु की लंगोट पानी में बह गई और वह इस अवस्था में बाहर कैसे निकले? इस कारण वह एक झाड़ी के पीछे छिप गया। द्रोपदी ने साधु को इस अवस्था में देख अपनी साड़ी से लंगोट के बराबर कोना फाड़कर उसे दे दिया। साधु ने प्रसन्न होकर द्रौपदी को आशीर्वाद दिया।
 
अगले पन्ने पर दूसरा पुण्य कार्य...
 
दूसरा पुण्य : एक अन्य कथा के अनुसार जब श्रीकृष्ण द्वारा सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया गया, उस समय श्रीकृष्ण की अंगुली भी कट गई थी। अंगुली कटने पर श्रीकृष्ण का रक्त बहने लगा। तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी फाड़कर श्रीकृष्ण की अंगुली पर बांधी थी।
 
इस कर्म के बदले श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को आशीर्वाद देकर कहा था कि एक दिन अवश्य तुम्हारी साड़ी की कीमत अदा करुंगा। इन कर्मों की वजह से श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की साड़ी को इस पुण्य के बदले ब्याज सहित इतना बढ़ाकर लौटा दिया और द्रोपदी की लाज बच गई। यह श्रीकृष्ण।।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें
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