क्या था बालि की शक्ति का राज, जानिए

अत्यधिक ताकतवर होने के बावजूद जब रावण पाताल लोक के राजा बालि के साथ युद्ध करने गया तो राजा बालि के भवन में खेल रहे बच्चों ने ही उसे पकड़कर अस्तबल में घोड़ों के साथ बांध दिया था। बड़ी मुश्किल से उनसे छुटकर जब वह संध्यावंदन कर रहे बालि की ओर बढ़ा तो बालि के मंत्री ने उसको बहुत समझाया कि आप उन्हें संध्यावंदन कर लेने दें अन्यथा आप मुसीबत में पड़ जाएंगे, लेकिन रावण नहीं माना।

रावण संध्या में लीन बालि को पीछे से जाकर उसको पकड़ने की इच्छा से धीरे-धीरे आगे बढ़ा। बालि ने उसे देख लिया था किंतु उसने ऐसा नहीं जताया तथा संध्यावंदन करता रहा। रावण की पदचाप से जब उसने जान लिया कि वह निकट है तो तुरंत उसने रावण को पकड़कर बगल में दबा लिया और आकाश में उड़ने लगा। राजा बालि ने रावण को अपनी बाजू में दबाकर 4 समुद्रों की परिक्रमा की।
बारी-बारी में उसने सब समुद्रों के किनारे संध्या की। राक्षसों ने भी उसका पीछा किया। रावण ने स्थान-स्थान पर नोचा और काटा किंतु बालि ने उसे नहीं छोड़ा। संध्या समाप्त करके किष्किंधा के उपवन में उसने रावण को छोड़ा तथा उसके आने का प्रयोजन पूछा। रावण बहुत थक गया था किंतु उसे उठाने वाला बालि तनिक भी शिथिल नहीं था। रावण समझ गया था कि बालि से लड़ना उसके बस की बात नहीं है तो उससे प्रभावित होकर रावण ने अग्नि कोसाक्षी बनाकर उससे मित्रता कर ली।

बालि की मृत्यु...




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