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पिता की मौत के बाद बदल गया साईबाबा का जीवन

Updated: गुरुवार, 2 जुलाई 2015 (12:50 IST)
साई जिस इलाके में रहते थे वह हैदराबाद निजामशाही का एक भाग था। उनकी राजशाही में मुस्लिमों का एक हथियारबंद संगठन था जिसे रजाकार कहा जाता था। इसके लोग हिन्दुओं को धर्मांतरण के लिए मजबूर करते थे। हिन्दुओं पर कट्टरपंथी लोग तरह-तरह के अत्याचार करते या उन पर मनमाने टैक्स लगाते थे।

sai baba
साई का परिवार गरीब ब्राह्मण परिवार था। निजामशाही के राज्य में ब्राह्मणों के ‍बुरे दिन थे। साई के माता-पिता जैसे-तैसे भिक्षा मांगकर, मजदूरी करके पांचों बच्चों का पेट पाल रहे थे। कई बार ऐसा होता कि माता-पिता को भूखा सोना पड़ता था, लेकिन वे दोनों बच्चों का पेट भरने के लिए जी-तोड़ मेहनत करते।

उनके घर के पास ही मुस्लिम परिवार रहता था। उनका नाम चांद मिया था और उनकी पत्नी चांद बी थी। उन्हें कोई संतान नहीं थी। हरिबाबू उनके ही घर में अपना ज्यादा समय व्यतीत करते थे। चांद बी हरिबाबू को पुत्रवत ही मानती थीं।

रजाकारों का जुल्म बढ़ा तो उनके पिता ने वह स्थान छोड़ने का मन बनाया। एक बार गंगाभाऊ अपने परिवार के साथ पंढरपुर गए। भीमा नदी पंढरपुर के पास से बहती है। गंगाभाऊ का परिवार नाव में बैठकर नदी पार कर रहा था तभी दुर्भाग्य से नाव पलटी और परिवार डूबने लगा। किनारे खड़े एक सूफी फकीर और तीर्थयात्रियों ने जैसे-तैसे सभी को बचाया लेकिन वे गंगाभाऊ को नहीं बचा सके।

जिस फकीर के प्रयास से यह परिवार बच गया उसका नाम था वली फकीर। उसने ही सभी अंतिम कार्य संपन्न कराए और देवगिरी सहित पांचों लड़कों के भोजन आदि की व्यवस्था की। मुस्लिम फकीर के साथ देवगिरी के रहने के कारण लोग उन्हें बदनाम करने लगे तो वली फकीर देवगिरी को समझा-बुझाकर हरिबाबू को अपने साथ ले गए। देवगिरी के दोनों बड़े पुत्र रोजी-रोटी की तलाश में हैदराबाद चले गए और खुद देवगिरी अपने दो पुत्रों के साथ अपनी माता के गांव चली गईं। इस तरह पिता की मौत के बाद पूरा परिवार बिखर गया।

शशिकांत शांताराम गडकरी की किताब 'सद्‍गुरु सांई दर्शन' (एक बैरागी की स्मरण गाथा) के अनुसार 8 वर्ष की उम्र में पिता की मृत्यु के बाद बाबा को सूफी वली फकीर ने पाला, जो उन्हें एक दिन ख्वाजा शमशुद्दीन गाजी की दरगाह पर इस्लामाबाद ले गए। यहां वे कुछ दिन रहे, जहां एक सूफी फकीर आए जिनका नाम था रोशनशाह फकीर। रोशनशाह फकीर हरिबाबू (साई बाबा) को अजमेर ले आए। (WD)

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लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें
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