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वेस्टइंडीज दौरे पर ही विराट कोहली कर सकते हैं सचिन तेंदुलकर के इस रिकॉर्ड की बराबरी

सोमवार,अगस्त 12, 2019
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एक अरब से ज्यादा की भीड़ हो चली है इस देश में। सवाल यह उठता है कि कैसे इस भीड़ को मैनेज किया जाए। कानून असफल हो रहे हैं। भीड़तंत्र के चलते लोग, नेता, पुलिस और मीडिया मनमानी करने लगे हैं। संविधान में सैंकड़ों संसोधन हो चुके हैं। नतीजा यह है कि अब लोग ...
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भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 26 जनवरी 1950 को भारतीय गणराज्य के राष्ट्रपति पद की शपथ ली। उस अवसर पर उन्होंने कहा- 'हमारे गणराज्य का उद्देश्य है इसके नागरिकों के लिए न्याय, स्वतंत्रता और समता प्राप्त करना तथा इस विशाल देश की सीमाओं ...
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संविधान निर्माण के समय, कुछ अधिकारों को बाध्यकारी मानकर मूलाधिकारों के खंड में रखा गया था, परन्तु कुछ अधिकारों को दिलाने का दायित्व शासन का माना तो गया था परन्तु उन्हें नीति-निर्देशक सिद्धांतों के रूप में एक पृथक खण्ड अध्याय 4 में रखा गया था। शायद ...
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भारत के प्रथम राष्‍ट्रपति डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद ने 26 जनवरी 1950 को 21 तोपों की सलामी के बाद भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज को फहराकर 59 वर्ष पहले भारतीय गणतंत्र के ऐतिहासिक जन्‍म की घो‍षणा की थी। अंग्रेजों के शासनकाल से छुटकारा पाने के 894 दिन बाद हमारा ...
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जिसकी गोदी में गौतम-गांधी का जीवित दर्शन है हे भारत मां तेरा अभिनन्दन है। तुझे करोड़ों हाथों का यह वंदन है। तन-मन-धन तुझपे वारे, यह शीश झुकाए रहते हैं। हम तेरे ही बालक माता, यह बड़े गर्व से कहते हैं। इस माटी से जब तिलक करूं तो लगती ये चंदन है। हे भारत ...
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पावन है गणतंत्र यह

बुधवार,जनवरी 25, 2012
पावन है गणतंत्र यह, करो खूब गुणगान। भाषण-बरसाकर बनो, वक्ता चतुर सुजान॥ वक्ता चतुर सुजान, देश का गौरव गाओ। श्रोताओं का मान करो नारे लगवाओ॥ इसी रीति से बनो सुनेता 'रामसुहावन'।कीर्ति-लाभ का समय सुहाना यह दिन पावन॥ भाई तुमको यदि लगा, जन सेवा का रोग। ...
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गणतंत्र दिवस है प्रतीक स्वाभिमान का सद्भाव का, सद्बुद्धि का, उस संविधान का जिसने सभी धर्मों का नित सम्मान किया है जो रखता पूरा ध्यान है सबके उत्थान का जो दिखाता है पथ हमें बढ़ने का साथ-साथ जिसकी कि भावना ने मजबूत किए हैं हाथ निस्वार्थ प्रगति का दिया ...
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हिन्दी दोहे गणतंत्र के

बुधवार,जनवरी 25, 2012
भारत के गणतंत्र का, सारे जग में मान। छह दशकों से खिल रही, उसकी अद्भुत शान॥ सब धर्मों को मान दे, रचा गया इतिहास। इसीलिए हर नागरिक, के अधरों पर हास॥ प्रजातंत्र का तंत्र यह, लिए सफलता-रंग। जात-वर्ग औ क्षेत्र का, भेद नहीं है संग॥ पांच वर्ष में हो रहा, ...
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गणतंत्र दिवस फिर आया है

बुधवार,जनवरी 25, 2012
आज नई सज-धज से गणतंत्र दिवस फिर आया है। नव परिधान बसंती रंग का माता ने पहनाया है। भीड़ बढ़ी स्वागत करने को बादल झड़ी लगाते हैं। रंग-बिरंगे फूलों में ऋतुराज खड़े मुस्काते हैं। धरनी मां ने धानी साड़ी पहन श्रृंगार सजाया है। गणतंत्र दिवस फिर आया है।
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सत्य औ अहिंसा का, देता जो मंत्र है हर्षोल्लास भरा, दिवस गणतंत्र है। आबाल वृद्ध, नर नारी के, ह्रदय में देश प्रेम, प्रसारता, हमारा गणतंत्र है। सेवा, समर्पण और, त्याग भरी भावना तन मन, धन वारना, सिखाता गणतंत्र है। नफरत बुराई बैर आदि को मेटता जन मन में, ...
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राष्ट्रगीत हो या राष्ट्रध्वज देशवासियों के आन-बान और शान के साथ प्रेरणा स्रोत होता है। जो राष्ट्रीय सार्वभौमिकता का प्रतीक है। राष्ट्र के सम्मान का गीत "जन गण मन" तमाम हिन्दुस्तानियों की शान और जोश का संचार करने वाला ऐसा ही राष्ट्रगीत है जो रग-रग ...
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राष्ट्र गान के अंतिम पद

बुधवार,जनवरी 25, 2012
अहरह तव आह्वान प्रचारित, शुनि तव उदार बाणी। हिन्दु बौद्घ शिख जैन पारसिक, मुसलमान ख्रिस्तानी। पूरब पश्चिम आसे, तव सिंहासन पाशे; प्रेमहार जय गाथा। जन-गण-ऐक्य-विधायक जय हे, भारत-भाग्य-विधाता। जय हे, जय हे, जय हे,जय जय जय, जय हे ॥
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