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क्या आप जानते हैं खर मास की पौराणिक कथा

Updated: गुरुवार, 16 मार्च 2017 (14:32 IST)
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार खर मास की कहानी कुछ यूं है। भगवान सूर्यदेव सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार ब्रह्मांड की परिक्रमा करते रहते हैं। उन्हें कहीं पर भी रूकने की इज़ाजत नहीं है। उनके रूकते ही जन-जीवन भी ठहर जाएगा। लेकिन जो घोड़े उनके रथ में जुड़े होते हैं वे लगातार चलने व विश्राम न मिलने के कारण भूख-प्यास से बहुत थक जाते हैं।

उनकी इस दयनीय दशा को देखकर सूर्यदेव का मन भी द्रवित हो गया। भगवान सूर्यदेव उन्हें एक तालाब के किनारे ले गये लेकिन उन्हें तभी यह भी आभास हुआ कि अगर रथ रूका अनर्थ हो जाएगा। लेकिन घोड़ों का सौभाग्य कहिए कि तालाब के किनारे दो खर मौजूद थे। भगवान सूर्यदेव घोड़ों को पानी पीने व विश्राम देने के लिए छोड़ देते हैं और खर यानि गधों को अपने रथ में जोड़ लेते हैं। अब घोड़ा घोड़ा होता है और गधा गधा, रथ की गति धीमी हो जाती है फिर भी जैसे तैसे एक मास का चक्र पूरा होता है तब तक घोड़ों को भी विश्राम मिल चुका होता है इस तरह यह क्रम चलता रहता है और हर सौर वर्ष में एक सौर मास खर मास कहलाता है।
 
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खर मास अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार 16 दिसंबर के आस पास सूर्य देव के धनु राशि में संक्रमण से शुरु होता है 14 जनवरी को मकर राशि में संक्रमण न होने तक रहता है। इसी तरह 14 मार्च के असापास सूर्य मीन राशि में संक्रमित होते हैं। इस दौरान लगभग सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।

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