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युधिष्ठिर ने क्यों दिया समूची नारी जाति को श्राप

Updated: रविवार, 21 फ़रवरी 2021 (16:54 IST)
महाभारत का प्रसंग है। जब अर्जुन द्वारा अंगराज कर्ण का वध कर दिया गया तब पाण्डवों की माता कुन्ती कर्ण के शव पर उसकी मृत्यु का विलाप करने पंहुची। अपनी माता को कर्ण के शव पर विलाप करते देख युधिष्ठिर ने कुन्ती से प्रश्न किया कि 'आप हमारे शत्रु की मृत्यु पर विलाप क्यों कर रहीं है?'
 
 तब कुन्ती ने युधिष्ठिर को कहा कि "ये तुम्हारे शत्रु नहीं, ज्येष्ठ भ्राता हैं।' और उन्हें पूरी कर्ण जन्म की पूरी कथा सुनाई।
 
 यह सुनकर युधिष्ठिर अत्यन्त दु:खी हुए। उन्होंने माता कुन्ती से कहा कि आपने इतनी बड़ी बात छिपाकर हमें हमारे ज्येष्ठ भ्राता का हत्यारा बना दिया। तत्पश्चात् समस्त नारी जाति श्राप देते हुए युधिष्ठिर बोले -  'मैं आज से समस्त नारी जाति को श्राप देता हूं कि वे अब चाहकर भी कोई बात अपने ह्रदय में नहीं छिपा सकेंगी।' जनश्रुति है कि धर्मराज युधिष्ठिर के इसी श्राप के कारण स्त्रियां कोई भी बात छिपा नहीं सकतीं।
 
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com 

लेखक के बारे में
पं. हेमन्त रिछारिया
ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया ज्योतिष प्रभाकर उपाधि से सम्मानित हैं। विगत 12 वर्षों से ज्योतिष संबंधी अनुसंधान एवं ज्योतिष से जुड़ी गलत धारणाओं का खंडन कर वास्तविक ज्योतिष के प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहे हैं। कई ज्योतिष आधारित पुस्तकों का लेखन।.... और पढ़ें

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