Shree Sammed Shiakhrji | श्री सम्मेद शिखरजी
जैनियों का विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल
- अरविंद कुमार
गिरिडीह जिले में झारखंड का हिमालय कहे जाने वाले पारसनाथ पर्वत पर जैनियों का पवित्र तीर्थ शिखरजी श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। यह जैनियों का विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल शिखरजी है। एक ओर पारसनाथ पर्वत इस जिले को मिली प्रकृति की अनुपम भेंट है तो दूसरी ओर वह लोगों के हृदय में प्रेम और भक्ति की प्रगाढ़ भावना जगाने में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रहा है।
झारखंड का हिमालय कहे जाने वाले इस पर्वत पर स्थित शिखरजी से छूकर निकलने वाली हवा विश्व के कोने-कोने में शांति और अहिंसा का संदेश पहुँचा रही है। श्री सम्मेद शिखरजी के रूप में चर्चित इस पुण्य क्षेत्र में जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों ने मोक्ष की प्राप्ति की। यहीं 23 वें तीर्थकर भगवान पार्श्वनाथ ने भी निर्वाण प्राप्त किया था। इस पावन भूमि की खूबसूरती में भव्य व आकर्षक मंदिरों एवं ठहराव स्थलों चार चाँद लगा दिए हैं। यहाँ साल भर पहुँचने वाले जैन धर्मावलंबियों के साथ-साथ अन्य पर्यटक भी पारसनाथ पर्वत की वंदना करना जरूरी समझते हैं।
गिरिडीह जिला मुख्यालय से 27 किलोमीटर दूर स्थित पारसनाथ पर्वत की भौगोलिक बनावट कटरा व वैष्णो देवी की याद दिला देता है। कटरा की तरह ही यहाँ मधुबन बाजार स्थित है। जैन श्रद्धालु पर्वत की वंदना के लिए यहीं से चढ़ाई शुरू करते हैं। पवित्र पर्वत के शिखर तक श्रद्धालु पैदल या डोली से जाते हैं। जंगलों व पहाड़ों के दुर्गम रास्तों से गुजरते हुए वे नौ किलोमीटर की यात्रा तय कर शिखर पर पहुँचते हैं।
यहाँ भगवान पार्श्वनाथ व चंदा प्रभु के साथ सभी 24 तीर्थंकरों से जुड़े स्थलों के दर्शन के लिए नौ किलोमीटर चलना पड़ता है। इन स्थलों के दर्शन के बाद वापस मधुबन आने के लिए नौ किलोमीटर चलना पड़ता है। पूरी प्रक्रिया में 10 से 12 घंटे का समय लगता है। रास्ते में भी कई भव्य व आकर्षक मंदिरों की श्रृंखलाएँ देखने को मिलती हैं। मंदिर व धर्मशालाओं में की गई आकर्षक नक्काशी आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
मधुबन में ठहरने के लिए दिगंबर व श्वेतांबर समाज की कोठियों के साथ भव्य व आकर्षक ठहराव स्थल भी हैं। वैसे तो यहाँ साल भर देश-विदेश से श्रद्धालुओं व सैलानियों का ताँता लगा रहता है लेकिन यहाँ फागुन महोत्सव में यात्रियों की भीड़ देखते ही बनती है। इस महोत्सव में भाग लेने वाले लोग देश के कोने-कोने से पहुँचते हैं।
जैन धर्मावलंबी तो इस पवित्र नगरी में पहुँचकर अपने को धन्य महसूस करते हैं। इस पवित्र नगरी तक पहुँचने के लिए लोग सड़क व रेलमार्ग का इस्तेमाल करते हैं।
यहाँ पहुँचने के लिए आपको दिल्ली-हावड़ा ग्रैंड कॉर्ड रेल लाइन पर स्थित पारसनाथ रेलवे स्टेशन उतरना पड़ता है। स्टेशन से सम्मेद शिखर 22 किलोमीटर दूर है। यहाँ से शिखरजी जाने के लिए समय-समय पर छोटी गाड़ियाँ छूटती रहती हैं। गिरिडीह रेलवे स्टेशन व बस पड़ाव से भी शिखरजी जाने के लिए किराए पर छोटी गाड़ियाँ आसानी से मिल जाती हैं।
SUNDAY MAGAZINE
गिरिडीह जिले में झारखंड का हिमालय कहे जाने वाले पारसनाथ पर्वत पर जैनियों का पवित्र तीर्थ शिखरजी श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। यह जैनियों का विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल शिखरजी है। एक ओर पारसनाथ पर्वत इस जिले को मिली प्रकृति की अनुपम भेंट है तो दूसरी ओर वह लोगों के हृदय में प्रेम और भक्ति की प्रगाढ़ भावना जगाने में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रहा है।
झारखंड का हिमालय कहे जाने वाले इस पर्वत पर स्थित शिखरजी से छूकर निकलने वाली हवा विश्व के कोने-कोने में शांति और अहिंसा का संदेश पहुँचा रही है। श्री सम्मेद शिखरजी के रूप में चर्चित इस पुण्य क्षेत्र में जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों ने मोक्ष की प्राप्ति की। यहीं 23 वें तीर्थकर भगवान पार्श्वनाथ ने भी निर्वाण प्राप्त किया था। इस पावन भूमि की खूबसूरती में भव्य व आकर्षक मंदिरों एवं ठहराव स्थलों चार चाँद लगा दिए हैं। यहाँ साल भर पहुँचने वाले जैन धर्मावलंबियों के साथ-साथ अन्य पर्यटक भी पारसनाथ पर्वत की वंदना करना जरूरी समझते हैं।
SUNDAY MAGAZINE
यहाँ भगवान पार्श्वनाथ व चंदा प्रभु के साथ सभी 24 तीर्थंकरों से जुड़े स्थलों के दर्शन के लिए नौ किलोमीटर चलना पड़ता है। इन स्थलों के दर्शन के बाद वापस मधुबन आने के लिए नौ किलोमीटर चलना पड़ता है। पूरी प्रक्रिया में 10 से 12 घंटे का समय लगता है। रास्ते में भी कई भव्य व आकर्षक मंदिरों की श्रृंखलाएँ देखने को मिलती हैं। मंदिर व धर्मशालाओं में की गई आकर्षक नक्काशी आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
SUNDAY MAGAZINE
जैन धर्मावलंबी तो इस पवित्र नगरी में पहुँचकर अपने को धन्य महसूस करते हैं। इस पवित्र नगरी तक पहुँचने के लिए लोग सड़क व रेलमार्ग का इस्तेमाल करते हैं।
यहाँ पहुँचने के लिए आपको दिल्ली-हावड़ा ग्रैंड कॉर्ड रेल लाइन पर स्थित पारसनाथ रेलवे स्टेशन उतरना पड़ता है। स्टेशन से सम्मेद शिखर 22 किलोमीटर दूर है। यहाँ से शिखरजी जाने के लिए समय-समय पर छोटी गाड़ियाँ छूटती रहती हैं। गिरिडीह रेलवे स्टेशन व बस पड़ाव से भी शिखरजी जाने के लिए किराए पर छोटी गाड़ियाँ आसानी से मिल जाती हैं।
