इस विद्या के बारे में जानकारी मिलने के बाद हमने तलाशना शुरू किया ऐसे व्यक्ति क ो, जिसका यशवंतजी ने इलाज किया हो। इस तलाश के दौरान हमारी मुलाकात हुई सरमन गोयल से। पेशे से अध्यापक सरमनजी ने बताया कि मुझे ऐसी बातों पर कतई विश्वास न था। एक सुबह झाड़ू लगाते हुए मुझे साँप ने काट लिया। मैं दौड़ा-दौड़ा भागवतजी के पास गया। उन्होंने मंत्र फूंका और कुछ ही देर में जहर की जलन शांत हो गई। मैं आज भला-चंगा हूँ तो भागवतजी की कृपा से।
फोटोगैलरी देखनें के लिए क्लिक करें! सरमनजी अकेले नही ं, ऐसे सैकड़ों पीड़ित लोग है ं, जिनका विश्वास है कि भागवतजी अपनी मंत्र-शक्तियों के जरिए सर्पदंश का इलाज कर देते हैं। यमराज के लेखपाल चित्रगुप्त की तरह भागवतजी ने भी अपने द्वारा इलाज किए लोगों का लेखा-जोखा अपने रजिस्टर में लिख रखा है। इस लेखे-जोखे से तीन रजिस्टर भर चुके हैं। भागवतजी हर काम ऊपर वाले के नाम पर करते है ं, इसलिए वे एक पैसा लेना भी पाप समझते हैं। वे कहते हैं मैं कुछ नहीं करता, करने वाले तो साँई-राम हैं।