नई माता का मंदिर
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कहा जाता है कि किसी के हाथ या पैर का कोई जख्म हो तो वह माता के द्वार से स्वस्थ होकर लौटता है। महाराष्ट्र से आए रवीन्द्र का कहना है कि नियमित रूप से पाँच मंगलवार माता के दर्शन करने से पीड़ित व्यक्ति अपनी समस्या से निजात पा सकता है। वहीं यहाँ आने वाले व्यक्ति को परहेज करने के साथ-साथ डॉक्टर के पास न जाने की सख्त हिदायत दी जाती है।
यहाँ आने वाले लोगों में तरह-तरह की धारणाएँ प्रचलित हैं। ऐसे ही एक श्रद्धालु सदाशिव चौधरी का मानना है कि सफेद वस्तु का प्रयोग करने से माता का प्रकोप अत्यंत बढ़ जाता है। यहाँ तक कि भोजन में सफेद चीजों के प्रयोग से माता क्रोधित हो सकती हैं। काला कपड़ा पहनना अपशकुन माना जाता है। शवयात्रा में जाने से रोगी का रोग बिगड़ सकता है। इसी तरह की कई धारणाएँ लोगों के मन में घर कर चुकी हैं।
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आज जहाँ हम हर छोटी से छोटी बीमारी के लिए डॉक्टर के पास इलाज के लिए जाते हैं, वहीं बिरोदाबाद आने वाले लोगों का गंभीर से गंभीर बीमारी में डॉक्टर की सलाह न लेकर जादू-टोने पर विश्वास करना इस देश में फैले अंधविश्वास के भयानक रूप को दिखाता है।
