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विघ्नहर्ता दूर करेंगे हर संकट: जानें आषाढ़ कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का महत्व, पूजा मुहूर्त, विधि और मंत्र
Ashadha Sankashti Chaturthi: हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान श्रीगणेश की आराधना के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह व्रत रखा जाता है और हर संकष्टी चतुर्थी का एक विशेष नाम एवं धार्मिक महत्व होता है।ALSO READ: देवशयनी एकादशी से चातुर्मास क्यों शुरू होता है? जानें धार्मिक मान्यता और आध्यात्मिक महत्व
महत्व: आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस बार की चतुर्थी इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग और इंद्र योग का एक दुर्लभ और बेहद शुभ संयोग बन रहा है। शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी 'संकष्टी' और अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी 'विनायकी' कहलाती है।
इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने और चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत का पारण करने की परंपरा है। यदि आप आषाढ़ कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय, पूजा विधि, व्रत नियम, कथा, मंत्र, पारण का समय और धार्मिक महत्व जानना चाहते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी। यहां आपको इस पावन व्रत से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है...
संकष्टी चतुर्थी पर चौघड़िया मुहूर्त 2026
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी: 3 जुलाई 2026, शुक्रवार को
चतुर्थी तिथि का प्रारम्भ- 03 जुलाई 2026 को 11:20 ए एम से,
चतुर्थी तिथि की समाप्ति- 04 जुलाई 2026 को 12:39 पी एम पर।
संकष्टी के दिन चन्द्रोदय का समय- 09:53 पी एम
गणेश चतुर्थी के व्रत में इस समय चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।
आसान शब्दों में स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि
अगर आप भी इस दिन व्रत रख रहे हैं, तो इन आसान स्टेप्स से बप्पा की आराधना करें:
सुबह की शुरुआत: प्रात:काल जल्दी उठकर स्नान करें। एक साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
श्रृंगार और अर्पण: बप्पा को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद रोली, कलावा, फूल, हल्दी, चंदन, धूप और उनका सबसे प्रिय दूर्वा या दूब घास चढ़ाएं।
व्रत का संकल्प: भगवान के सामने हाथ जोड़कर पूरे दिन निर्जला या फलाहारी व्रत का संकल्प लें।
पाठ और ध्यान: दिनभर में या गोधूलि बेला यानी शाम के समय में गणेश नामावली, गणेश अथर्वशीर्ष या गणेश चालीसा का पाठ करें।
भोग और दान: बप्पा को मोदक, लड्डू, केला और नारियल का भोग लगाएं। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन या अन्न दान करना बेहद शुभ माना जाता है।
चंद्रोदय पूजा: रात के समय गणेश जी के साथ-साथ चंद्रमा को भी मोदक या लड्डू का अर्घ्य दें। इसके बाद उसी लड्डू को प्रसाद रूप में खाकर अपना व्रत खोलें।
बप्पा को प्रसन्न करने के चमत्कारी मंत्र
पूजा के दौरान इन मंत्रों का शांत मन से जाप करें, भाग्य के बंद दरवाजे खुल जाएंगे:
* सरल मंत्र: 'श्री गणेशाय नम:'
* सफलता के लिए: 'ॐ गं गणपतये नम:'
* संकट नाश के लिए: 'ॐ वक्रतुंडा हुं।'
* सर्व-मनोकामना पूर्ति: 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।'
* सदाबहार मंत्र: 'वक्रतुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ। निर्विघ्नम कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा।।'
* गणेश गायत्री मंत्र: 'एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।'
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