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शुक्रवार : कैसे करें संतोषी माता और वैभवलक्ष्मी का व्रत, जानिए पूजन विधि...

Updated: शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017 (10:32 IST)
*  शुक्रवार के व्रत से होगी मनोकामनाएं पूर्ण, पूजन ऐसे करें... 
 
शुक्रवार का व्रत 3 तरह से किया जाता है। इस दिन भगवान शुक्र के साथ-साथ संतोषी माता तथा वैभवलक्ष्मी देवी का भी पूजन किया जाता है। तीनों व्रतों की विधियां अलग-अलग हैं। जो स्त्री-पुरुष शुक्रवार को संतोषी माता का व्रत करते हैं, उनके लिए व्रत-विधि इस प्रकार है -
 
शुक्रवार (संतोषी माता) व्रत विधि :- 
 
* सूर्योदय से पूर्व उठें।
 
* घर की सफाई कर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं।
 
* घर के ही किसी पवित्र स्थान पर संतोषी माता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
 
* संपूर्ण पूजन सामग्री तथा किसी बड़े पात्र में शुद्ध जल भरकर रखें।
 
* जलभरे पात्र पर गुड़ और चने से भरकर दूसरा पात्र रखें।
 
* संतोषी माता की विधि-विधान से पूजा करें।
 
* इसके पश्चात संतोषी माता की कथा सुनें।
 
* तत्पश्चात आरती कर सभी को गुड़-चने का प्रसाद बांटें।
 
* अंत में बड़े पात्र में भरे जल को घर में जगह-जगह छिड़क दें तथा शेष जल को तुलसी के पौधे में डाल दें। 
 
उद्यापन इस प्रकार करें - इसी प्रकार 16 शुक्रवार का नियमित उपवास रखें। अंतिम शुक्रवार को व्रत का विसर्जन करें। विसर्जन के दिन उपरोक्त विधि से संतोषी माता की पूजा कर 8 बालकों को खीर-पूरी का भोजन कराएं तथा दक्षिणा व केले का प्रसाद देकर उन्हें विदा करें। अंत में स्वयं भोजन ग्रहण करें।

 


शुक्रवार (वैभवलक्ष्मी) व्रत विधि :- 
 
शुक्रवार को लक्ष्मीदेवी का भी व्रत रखा जाता है। इसे वैभवलक्ष्मी व्रत भी कहा जाता है। 
 
* इस दिन स्त्री-पुरुष देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हुए श्वेत अथवा लाल रंग के पुष्प, श्वेत या लाल चंदन से पूजा करें। 
 
* चावल और खीर से भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। 
 
* इस व्रत के दिन उपासक को एक समय भोजन करते हुए खीर अवश्य खानी चाहिए। 
 
उद्यापन इस प्रकार करें - 11 या 21 जितने भी शुक्रवार की मन्नत ली हो, उतने उपवास करें। फिर अंतिम शुक्रवार को उपवास रखकर मां वैभवलक्ष्मी का पूजन करें और 7 या 9 कन्याओं या सुहागिन महिलाओं को खीर-पूरी का भोजन करवाएं तथा वैभवलक्ष्मी‍ व्रत की पुस्तक, दक्षिणा व केले का प्रसाद देकर उन्हें विदा करें। अंत में स्वयं भोजन ग्रहण करें। 

 
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