धन को लेकर चाणक्य की ये 10 बातें आपको जरूर जाननी चाहिए


यह सही है कि धन ही सबकुछ नहीं होता लेकिन धन से ही सबकुछ पाया जा सकता है। कहते हैं कि धन से आपके जीवन की लगभग 70 प्रतिशत समस्याएं स्वत: ही समाप्त हो जाती है यह अलग बात है कि आप धन के बल पर समस्याएं खड़ी करने में लग जाएं। धन आदमी के जीवन में बहुत महत्व रखता है आइए जानते हैं कि चाणक्य इस संबंध में क्या कहते हैं।

1.धन की बचत-
व्यक्ति को बुरे दिनों के लिए धन की बचत करनी चाहिए और अपनी महिला की रक्षा हर हालत में करनी चाहिए भले ही उसको अपने बचत के पैसे भी खर्च करने पड़े।

2.धन से मिलता सम्मान-
धन संपत्ति जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग है यह आपको सम्मान दिलाता है और आपको आपदाओं से जुझने में समर्थ बनाता है।

3.समृद्ध जगह पर रहें-
ऐसे देश या क्षेत्र, जहां पर आपको रोजगार, इज्जत, शुभ चिंतक और शिक्षा न मिले, में रहने का कोई फायदा नहीं है। जहां पर समृद्ध व्यापारी, शिक्षित ब्राह्मण, सैनिक, नदी और चिकित्सक न हो ऐसी जगह पर एक दिन के लिए भी नहीं रुकना चाहिए।

4.धन से परीक्षा-
अपनी पत्नी की परीक्षा धन-संपत्ति खोने के बाद करें, दोस्त को आवश्यकता के समय, और नौकर को महत्वपूर्ण कार्य देने के बाद परखें। सच्चा पुत्र अपने पिता के प्रति आज्ञाकारी होता है और सच्चा पिता अपने बच्चे का ध्यान रखता है। ईमानदारी सच्चे दोस्त की सही पहचान है।

5. धन का मोह नहीं-
जो धन बहुत मेहनत के बाद मिले, जिसके लिए अपने धर्म का त्याग करना पड़े, जिसके लिए शत्रुओं की खुशामद करनी पड़े उस धन का मोह नहीं करना चाहिए।

6.और मोक्ष
जिस व्यक्ति के पास आस्था, धन और कोई लगाव नहीं होता उसको कभी मोक्ष नहीं मिलता है वह जन्म और मरण के चक्र में फंसा रहता है।
7.गरीबी एक रोग है-
गरीब और गरीबी के साथ जीवन व्यतीत करना जहर के समान है। अनजानी जगह पर दक्षता सबसे बड़ी मित्र होती है। अच्छे स्वभाव की महिला सच में पुरुष की सबसे अच्छी दोस्त होती है। दवाई बीमार की दोस्त है और दान पुण्य अगले जन्म में काम आता है।

8.अत्यधिक दान से नुकसान-
अत्यधिक सुंदरता के कारण सीता का अपहरण हुआ, अति घमंड की वजह से रावण मारा गया और अत्यंत दानवीरता की वजह से बाली को बहुत कष्ट हुआ। इसलिए दान हमेशा अपनी सीमा में रहकर करें।

9.कला, दान-पुण्य ही सबसे बड़ा धन-
ऐसी जगह पर निवास नहीं करना चाहिए जहा पर लोग नियम-कानून से नहीं डरते हैं, चतुर लोग नहीं होते हैं लोगों में दान-पुण्य की भावना की कमी होती है, और जहां पर कला का वास नहीं है।

10.धन लक्ष्य है तो...
वह व्यक्ति जो अपना लक्ष्य निर्धारित नहीं कर सकता है वह कभी विजयी नहीं हो सकता है। अपनी योजनाओं के बारे में किसी से चर्चा ना करें क्योंकि अन्य लोग आपके कार्य में बाधा पहुंचा सकते हैं। साधारण सा सुझाव है कि आप अपने लक्ष्य का पीछा बगैर किसी के ध्यान की अपेक्षा के करें। धन चाहिए तो अपने कर्मों पर ध्यान केंद्रित करें।




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