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घर-घर होगी तुलसी पूजा
देवउठनी एकादशी पर 17 नवंबर को तुलसी-सालिगराम का विवाह किया जाएगा। विवाह मंडप के लिए बाजार में गन्नों की बिक्री शुरू हो गई है। अधिकतर घरों में गन्नों से मंडप सजाया जाएगा। इसी दिन चार माह से आराम कर रहे देवी-देवता भी जागेंगे।आज घर-घर में तुलसी पूजा की जाएगी। इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है। माना जाता है कि विवाह के शुभ मुहूर्त की शुरुआत तुलसी पूजा के साथ होती है। इस दिन बिना मुहूर्त देखे विवाह संपन्न किया जा सकता है। हिन्दू धर्म में कन्यादान को महादान की संज्ञा की दी गई है। कन्यादान के बिना कोई भी दान संपूर्ण नहीं होता। इसलिए तुलसी को बेटी मानकर घर-घर में विवाह संपन्न किया जाएगा। कन्या के विवाह की तरह सभी रीतिरिवाज निभाते हुए तुलसी की शादी सालिगराम से संपन्न की जाएगी। जिनके घरों में कन्या नहीं है अथवा जिन लोगों ने अभी तक कन्यादान नहीं किया है, वे लोग कन्यादान की सभी रस्में निभाएँगे।पूजा-पाठ के बाद वर-वधू को दी जाने वाली दहेज सामग्री पंडितों को देंगे। शास्त्रों में तुलसी को माता लक्ष्मी व सालिगराम को विष्णु के रूप में माना गया है।