समतामूलक समाज के प्रेरणापुंज हैं गुरुनानक देव जी : कमिश्नर डॉ. भार्गव

Last Updated: मंगलवार, 12 नवंबर 2019 (23:04 IST)
रीवा। गुरुनानक देवजी केवल के ही नहीं वरन् समूची मानवता की धरोहर हैं, जिन्होंने तत्कालीन स्थापित मान्यताओं से अलग हटकर सामाजिक समरसता, साम्प्रदायिक सद्भाव, कौमी एकता आपसी भाईचारे और भेदभाव रहित समाज की संरचना का सूत्रपात किया। यह विचार रीवा संभाग के डॉ. अशोक कुमार भार्गव ने शहर की गल्ला मण्डी स्थित गुरुद्वारा में गुरुनानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के पावन अवसर पर व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि गुरुनानक देवजी ने सामाजिक एकता के लिए एक ही धर्मशाला में एकत्रित होकर सामूहिक लंगर, सामूहिक आराधना और सामुदायिक जीवन के आधार पर छूआछूत और अस्पृश्यता के विरुद्ध सामाजिक चेतना जागृत की। वे ईश्वरीय प्रतिभा से संपन्न दिव्यात्मा थे जिन्होंने मानव मात्र में ईश्वर का वास माना। उनकी कथनी करनी में अन्तर नहीं था। वह जो कहते थे, उसे अपने आचरण में उतारते भी थे। वह सभी धर्मों व समाज के सभी लोगों को समान भाव से देखते थे।

डॉ. भार्गव ने कहा कि गुरुनानक देवजी कहते थे कि ऊँच-नीच और भेदभाव की अमानवीय प्रथा को समाप्त करना होगा। गुरुनानक देव जी ने सदैव इस बात पर बल दिया कि हम सब मिलजुल कर रहें, किसी का अहित न करें और जरूरतमंदों की हर संभव मदद करें। ईमानदारी से परिश्रम कर अपनी अजीविका कमायें, मिल-बांटकर खाए और मर्यादापूर्वक ईश्वर का नाम जपते हुए आत्मनियंत्रण रखें। किसी भी तरह के लोभ अथवा लालच को त्यागकर परिश्रम और न्यायोचित तरीके से कर्मठतापूर्वक धन कमाएं।
कमिश्नर डॉ. भार्गव ने कहा कि गुरुनानक जी ने हवा को गुरू, पृथ्वी को माता और पानी को पिता माना। उन्होंने इन्हें बराबर महत्व देने की बात कही। उन्होंने उस दौर में पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संदेश देकर हमें आसन्न संकट के पूर्व ही सचेत कर दिया था। उन्होंने सही विश्वास, सही आराधना और सही आचरण की शिक्षा दी। गुरुनानकजी हमारे प्रेरणापुंज हैं। वह सामाजिक सद्भाव के मैत्री थे और बंधुता पर आधारित समाज के नव निर्माण में भागीदार बने।
कार्यक्रम में डीआईजी अविनाश शर्मा, कलेक्टर ओमप्रकाश श्रीवास्तव, आयुक्त नगर निगम सभाजीत यादव, सीईओ जिला पंचायत अर्पित वर्मा सहित अन्य अधिकारी, सरदार गुरमीत सिंह मंगू सहित बड़ी संख्या में सिख समाज के लोग उपस्थित थे।


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