ऑड-ईवन फॉर्मूला : कितना ऑड, कितना सही?

नई दिल्ली| Last Updated: रविवार, 13 दिसंबर 2015 (12:47 IST)
नई दिल्ली। अगले साल पहली जनवरी से दिल्ली में निजी गाड़ियों के लिए लागू होने जा रहा ऑड-इवन फॉर्मूला घटाने और यातायात से जुड़ी परेशानियों को कम करने में कितना सफल रहेगा, इसे जानने के लिए इस फॉर्मूले को लागू करने के तौर-तरीकों और इससे प्रभावित होने वाले पक्षों की प्रतिक्रिया पर नजर डालना जरूरी है।
दिल्ली सरकार ने राजधानी में खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके प्रदूषण का हवाला देते हुए यह फॉर्मूला लागू करने की ठान ली है। इसके मुताबिक राजधानी में एक दिन सम नंबर वाली और एक दिन विषम नंबर वाली गाड़ियां चल पाएंगी। यह व्यवस्था सुबह 8 बजे से लेकर रात 8 बजे तक के लिए होगी। सार्वजनिक और व्यावसायिक वाहनों तथा महिलाओं को सम-विषम फॉर्मूले से छूट दी गई है।> > सरकार का कहना है कि यह शुरुआती प्रयोग है, सफल रहा तो इसे स्थायी तौर पर लागू कर दिया जाएगा। इसके लिए दिल्ली मोटर वाहन नियम में बदलाव भी किए जाएंगे। नया नियम बनते ही ऑड-ईवन फॉर्मूले का उल्लंघन करने वालों को 2,000 रुपए या इससे भी ज्यादा का जुर्माना भरना पड़ सकता है।
नई व्यवस्था लागू करने की जिम्मेदारी ट्रैफिक पुलिस की होगी लेकिन उससे इस मामले पर कोई राय नहीं ली गई है। ऐसे में सवाल यह है कि फैसले को आखिर अमली जामा पहनाया कैसे जाएगा? इस मामले को लेकर जनता के मन में भी कई तरह की आशंकाएं हैं। उसे लगता है कि इससे राजधानी में यातायात और कष्टप्रद हो सकता है।

पर दिल्ली सरकार ने यह कहते हुए राहत पहुंचाने की कोशिश की है कि ऑड-ईवन फॉर्मूला लागू होते ही सरकार दिल्ली में 6 हजार अतिरिक्त बसें चलाएगी, ऑटो रिक्शा की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी और मेट्रो से सर्वाधिक क्षमता के साथ सेवाएं देने का अनुरोध किया जाएगा।

उधर (एनजीटी) ने अपनी अलग ही राय दी है। उसका कहना है कि ऑड-ईवन फॉर्मूले से दिल्ली में प्रदूषण का स्तर घटाने में कोई मदद नहीं मिलेगी। लोग 2-2 गाड़ियां खरीदना शुरू कर देंगे और बात घूम-फिरकर वहीं पहुंच जाएगी।

एनजीटी ने प्रदूषण रोकने के लिए डीजल वाहनों पर रोक लगाने की सलाह दी है और अपने ताजा आदेश में कहा है कि दिल्ली में डीजल वाहनों का नया पंजीकरण बंद किया जाए तथा सरकारी कार्यालयों में इस्तेमाल के लिए डीजल वाली गाड़ियां नहीं ली जाएं।

उसने यह भी कहा है कि 10 साल पुराने डीजल वाहनों के पंजीकरण का नवीकरण नहीं किया जाए। इस मामले में एनजीटी में अगली सुनवाई 6 जनवरी को होने वाली है। (वार्ता)



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