Dhirendra Shastri : बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आध्यात्मिक गुरु धीरेंद्र शास्त्री (बागेश्वर बाबा) ने रविवार को छत्रपति शिवाजी महाराज पर अपनी हालिया टिप्पणियों को लेकर विवाद पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि विवाद और मीडिया का ध्यान उनके भाग्य का हिस्सा बन गया है। बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज पर अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांग ली है। महाराष्ट्र में भारी विरोध के बाद उन्होंने खेद व्यक्त किया। शास्त्री ने दावा किया कि उनके बयान को सोशल मीडिया पर तोड़मरोड़ कर पेश किया गया। सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि अपमान करना तो दूर की बात है, मैं अपने सपने में भी छत्रपति शिवाजी महाराज की आलोचना बर्दाश्त नहीं कर सकता। छत्रपति शिवाजी महाराज पर दिए गए बयान के संदर्भ को स्पष्ट करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, संदर्भ बिल्कुल अलग था। हम एक शिष्य की अपने गुरु के प्रति भक्ति के बारे में बात कर रहे थे।
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आध्यात्मिक गुरु धीरेंद्र शास्त्री (बागेश्वर बाबा) ने रविवार को छत्रपति शिवाजी महाराज पर अपनी हालिया टिप्पणियों को लेकर विवाद पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि विवाद और मीडिया का ध्यान उनके भाग्य का हिस्सा बन गया है। बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज पर अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांग ली है।
महाराष्ट्र में भारी विरोध के बाद उन्होंने खेद व्यक्त किया। शास्त्री ने दावा किया कि उनके बयान को सोशल मीडिया पर तोड़मरोड़ कर पेश किया गया। सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि अपमान करना तो दूर की बात है, मैं अपने सपने में भी छत्रपति शिवाजी महाराज की आलोचना बर्दाश्त नहीं कर सकता।
छत्रपति शिवाजी महाराज पर दिए गए बयान के संदर्भ को स्पष्ट करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, संदर्भ बिल्कुल अलग था। हम एक शिष्य की अपने गुरु के प्रति भक्ति के बारे में बात कर रहे थे ठीक वैसे ही जैसे महाभारत में अर्जुन ने भगवान कृष्ण से कहा कि वह अपने ही लोगों से युद्ध नहीं करेंगे, तब कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया। उन्होंने कहा, हमने संतों और महान विभूतियों से सुना है कि छत्रपति शिवाजी महाराज की संतों के प्रति अगाध श्रद्धा और अपने गुरु समर्थ रामदास स्वामी के प्रति गहरी निष्ठा थी।
हमने यह बात किसी का अपमान करने के लिए नहीं कही थी। हमारा उद्देश्य केवल उनकी महानता को उजागर करना था कि वे संतों के प्रति कितने गहरे रूप से समर्पित थे, लेकिन एक छोटा सा अंश संदर्भ से काटकर फैला दिया गया। पिछली बार हमने कुछ नहीं कहा था, फिर भी विवाद खड़ा हो गया। इस बार हमने सम्मान के बारे में सकारात्मक बातें कीं कि छत्रपति शिवाजी महाराज कितने संत-तुल्य और समर्पित थे, लेकिन उन्हें गलत तरीके से पेश किया गया।
हमने कुछ भी अनुचित नहीं कहा
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, यह भी संभव है कि इसके पीछे कोई साजिश हो, क्योंकि जो कोई पूरा बयान सुनेगा और सही अर्थ समझेगा, वह इसे गलत नहीं मानेगा। हमने कुछ भी अनुचित नहीं कहा। हमने सम्मान व्यक्त करने के उद्देश्य से बात की थी। इसके बावजूद हमने खेद व्यक्त किया और माफी भी मांगी है। हम कभी यह नहीं कहते कि लोग हमारी पूजा करें। हर सभा और प्रवचन में हम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि हम लोगों को खुद से जोड़ने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें भगवान बालाजी हनुमान से जोड़ने के लिए हैं।
उन्होंने कहा, अगर भगवान हनुमान के प्रति भक्ति बढ़ाना, हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए प्रेरित करना या हनुमान मंदिरों में जाने के लिए कहना अंधविश्वास है तो फिर इस देश के सभी धर्मों को अंधविश्वास ही मानना पड़ेगा। उन्होंने सफाई दी कि वे महाराज का अपमान सह भी नहीं सकते। शास्त्री ने कहा कि उनका हिंदू राष्ट्र का संकल्प हिंदवी स्वराज से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि मैं तो संतों के प्रति महाराज की भक्ति बता रहा था।
क्या था विवादित बयान?
नागपुर के एक कार्यक्रम में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शिवाजी महाराज को लेकर एक दावा किया था। उन्होंने कहा था कि शिवाजी महाराज युद्धों से थक गए थे। उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को त्यागने की इच्छा जताई थी। शास्त्री के अनुसार, महाराज अपना मुकुट लेकर गुरु समर्थ रामदास के पास पहुंचे थे। शिवाजी महाराज ने अपना मुकुट उनके चरणों में रख दिया था। शास्त्री ने यह भी कहा था कि तब गुरु रामदास ने मुकुट वापस शिवाजी के सिर पर रखा और उन्हें सिखाया कि थकान के बावजूद अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना ही सच्ची सेवा है।
अभिनेता रितेश देशमुख ने जताई आपत्ति
अभिनेता और फिल्म निर्माता रितेश देशमुख ने सोशल मीडिया के माध्यम से कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज पर की गई टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि महाराज की विरासत को कमतर दिखाने का कोई भी प्रयास सफल नहीं होगा। देशमुख ने अपनी पोस्ट में शिवाजी महाराज के सम्मान में कई उपाधियों का उपयोग करते हुए उन्हें सम्राटों का सम्राट बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि महाराज का नाम करोड़ों वर्षों तक अमर रहेगा।
Edited By : Chetan Gour