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PM,CM और मंत्रियों को पद से हटाने वाले संशोधन विधेयक पर JPC आज करेगी चर्चा

JPC to discuss bill on removal of Prime Minister and Chief Ministers today, Prime Minister, Chief Minister
Joint Parliamentary Committee News : प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों के खिलाफ आपराधिक आरोपों के मामलों में उनको पद से हटाने से संबंधित विधेयक की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति आज महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों के साथ बातचीत करेगी। संविधान (130वां संशोधन) विधेयक की जांच कर रही संयुक्त समिति के सदस्य महाराष्ट्र और ओडिशा के दौरे पर हैं। भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली इस समिति ने कानूनी विशेषज्ञों और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के साथ भी बातचीत की है। संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 का उद्देश्य यह है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री ऐसे अपराधों में गिरफ्तार होकर लगातार 30 से अधिक दिनों तक हिरासत में रहते हैं, जिनमें पांच या उससे अधिक वर्षों की सजा का प्रावधान है, तो उन्हें अपने पद से स्वतः हटा दिया जाए।
 
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों के खिलाफ आपराधिक आरोपों के मामलों में उनको पद से हटाने से संबंधित विधेयक की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति आज महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों के साथ बातचीत करेगी। संविधान (130वां संशोधन) विधेयक की जांच कर रही संयुक्त समिति के सदस्य महाराष्ट्र और ओडिशा के दौरे पर हैं।
भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली इस समिति ने कानूनी विशेषज्ञों और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के साथ भी बातचीत की है। संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 का उद्देश्य यह है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री ऐसे अपराधों में गिरफ्तार होकर लगातार 30 से अधिक दिनों तक हिरासत में रहते हैं, जिनमें पांच या उससे अधिक वर्षों की सजा का प्रावधान है, तो उन्हें अपने पद से स्वतः हटा दिया जाए।
 
विपक्षी दलों ने यह आरोप लगाते हुए संयुक्त समिति से दूरी बना ली है कि प्रस्तावित कानून गैर-भाजपा और विपक्ष शासित सरकारों को अस्थिर करने के उद्देश्य से लाया गया है। संयुक्त संसदीय समिति (JPC) संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्यों से मिलकर बनी एक विशेष, अस्थाई समिति है। इसका गठन विशिष्ट विधेयकों की जांच, सरकारी कामकाज में वित्तीय अनियमितताओं या महत्वपूर्ण मामलों की जांच के लिए किया जाता है।
इसमें लोकसभा से दोगुनी संख्या में सदस्य होते हैं और यह जांच के लिए किसी भी व्यक्ति या संस्था को बुला सकती है। इसका गठन विशिष्ट विधेयकों की जांच, सरकारी कामकाज में वित्तीय अनियमितताओं या महत्वपूर्ण मामलों की जांच के लिए किया जाता है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के पद छोड़ने के प्रावधान वाले विधेयक को लेकर विपक्षी दलों का कहना है कि ये विधेयक संविधान और मौलिक अधिकारों के खिलाफ हैं। 
 
 

क्या होती है JPC?

जेपीसी का मतलब ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (संयुक्त संसदीय समिति) होता है। जिन बड़े मामलों पर गहराई से चर्चा और विचार करने की जरूरत होती है, उन्हें जेपीसी में भेज दिया जाता है।JPC दो तरह की होती हैं, जिनमें एक अस्थाई कमेटी होती है और दूसरी स्टैंडिंग कमेटी।स्पीकर जेपीसी के गठन के वक्त ही कार्यकाल का निर्धारण भी कर देते हैं। जेपीसी का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है।
जेपीसी मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति या संस्था से पूछताछ कर सकती है और पेश होने के लिए बुला सकती है। जेपीसी स्पीकर को अपनी रिपोर्ट पेश करती है और अंतिम फैसला स्पीकर ही लेते हैं। सरकार को अगर लगता है कि जेपीसी की रिपोर्ट देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है तो वो उसे रोक सकती है।
Edited By : Chetan Gour
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