200 मीटर का घेरा है, ढूंढ सको तो ढूंढ लो, दिल्ली पुलिस की बेरुखी और जल बोर्ड के गड्ढे ने छीन ली 'कमल' की जिंदगी
देश की राजधानी की सड़कों पर पसरा अंधेरा किसी के घर का चिराग बुझा देगा, यह पालम के रहने वाले कमल के परिवार ने सपने में भी नहीं सोचा था। जनकपुरी की एक सड़क पर जल बोर्ड द्वारा खोदा गया एक खुला गड्ढा, कमल के लिए 'मौत का कुआं' साबित हुआ। लेकिन इस त्रासदी से भी ज्यादा दर्दनाक वह दास्तां है, जो उस रात एक भाई ने अपने भाई को खोजने के लिए झेली। यह सिस्टम की लापरवाही का दूसरा घटना है जिसने किसी युवा की जिंदगी को छीन लिया।
हैरानी और गुस्से की बात यह है कि जिस गड्ढे को घेरने के लिए प्रशासन के पास कल तक एक साइन बोर्ड नहीं था, युवक की जान जाते ही वहां आनन-फानन में 'पर्दे' तान दिए गए। ये पर्दे उस गड्ढे को नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की उस नग्न लापरवाही को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को ताउम्र का दर्द दे दिया।
मीडिया खबरों के मुताबिक दिल्ली के जनकपुरी इलाके में गड्ढे में गिरने से बाइक सवार की मौत हो गई। मीडिया खबरों के मुताबिक बाइक सवार की पहचान कमल के रूप में कई है, जो कि एचडीएफसी बैंक में कार्यरत थे। कमल कैलाशपुरी के रहने वाले थे। आरोप है कि परिजन पुलिस थाने पहुंचे लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली।
इससे पहले सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता 16-17 जनवरी की रात को नोएडा के सेक्टर 150 में एक कंस्ट्रक्शन साइट के पास पानी से भरे गड्ढे में उनकी कार गिरने से डूब गए थे। इससे उनकी मौत हो गई थी। मौके पर पहुंचे राहत बचाव दल पर सवाल उठे थे। यह सिर्फ एक मौत नहीं, हत्या है उस लापरवाही की जो हर रोज सड़कों पर आम आदमी का पीछा करती है।
तड़पता रहा भाई, थानों के चक्कर काटता रहा परिवार
हादसा सिर्फ एक चूक नहीं है। यह लापरवाही की पराकाष्ठा है। सड़क के बीचोंबीच मौत का जाल बिछा था-न कोई बैरिकेडिंग, न कोई चेतावनी बोर्ड। कमल उस अंधेरे गड्ढे में गिरकर घंटों जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा, चीखता रहा, लेकिन उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था। दूसरी ओर एक बेबस भाई अपने कलेजे के टुकड़े को तलाशने के लिए मंगोलपुरी से लेकर रोहिणी और जनकपुरी तक, करीब आधा दर्जन थानों के चक्कर काटता रहा।
मिन्नतों और गुहारों से नहीं पसीजा सिस्टम का दिल
मीडिया खबरों के मुताबिक जब परिवार ने पुलिस से मोबाइल ट्रेस करने की भीख मांगी, तो जवाब मिला- लोकेशन जनकपुरी के 200 मीटर के दायरे में है, ढूंढ सको तो खुद खोज लो। सोचिए उस भाई पर क्या गुजरी होगी, जो आधी रात को सड़कों पर अपनों की सलामती की दुआ मांग रहा था और रक्षक बने सिस्टम ने उसे लाचारी के अंधेरे में धकेल दिया। जब सुबह 6.30 बजे फोन की घंटी बजी, तो वह मदद की खबर नहीं, बल्कि कमल की मौत का मातम लेकर आई।
उच्च स्तरीय समिति करेगी जांच
मीडिया खबरों के मुताबिक दिल्ली जल बोर्ड ने उच्च स्तरीय जांच समिति बिठा दी है। समिति को तुरंत दुर्घटनास्थल का निरीक्षण करने के निर्देश दिया गया है। समिति को आज शाम तक रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है। दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है। खबरों के मुताबिक जल बोर्ड के जेई समेत 3 अधिकारियों को सस्पेंड किया गया। Edited by : Sudhir Sharma