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रक्षा बंधन की राखी को क्या कहते थे प्राचीन या पौराणिक काल में, जानिए 5 रहस्य

Updated: बुधवार, 29 जुलाई 2020 (13:48 IST)
भाई बहन के त्योहार रक्षा बंधन पर जो राखी बांधी जाती है उसका नाम रखी कब रखा गया और राखी के पहले प्राचीन या पौराणिक काल में उसे क्या कहते थे। आओ जानते है इस संबंध में 5 खास बातें।
 
 
1. कहते हैं कि राक्ष को पहले 'रक्षा सूत्र' कहते थे। यह रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा वैदिक काल से रही है जबकि व्यक्ति को यज्ञ, युद्ध, आखेट, नए संकल्प और धार्मिक अनुष्ठान के दौरान कलाई पर नाड़ा या सू‍त का धागा जिसे 'कलावा' या 'मौली' कहते हैं- बांधा जाता था।
 
2. यही रक्षा सूत्र आगे चलकर पति-पत्नी, मां-बेटे और फिर भाई-बहन के प्यार का प्रतीक बन गया। रक्षा बंधन के अलावा भी अन्य कई धार्मिक मौकों पर आज भी रक्षा सूत्र (नाड़ा) बांधा जाता है।
 
3. रक्षा सूत्र को बोलचाल की भाषा में राखी कहा जाता है जो वेद के संस्कृत शब्द 'रक्षिका' का अपभ्रंश है। मध्यकाल में इसे राखी कहा जाने लगा।
 
 
4. भाई-बहन के इस पवित्र त्योहार को प्रचीनकाल में अलग रूप में मनाया जाता था। पहले सूत का धागा होता था, फिर नाड़ा बांधने लगे, फिर नाड़े जैसे एक फुंदा बाधने का प्रचलन हुआ और बाद में पक्के धाके पर फोम से सुंदर फुलों को बनाकर चिपकाया जाने लगा जो राखी कहलाने लगी। वर्तमान में तो राखी के कई रूप हो चले हैं। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है। 
 
5. यह भी कहा जाता है कि राखी को श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है इसलिए राक्ष कहने के पूर्व पहले इसे श्रावणी या सलूनो कहते थे। इसी तरह प्रत्येक प्रांत में इसे अलग अलग नामों से जाना जाने लगा है। जैसे दक्षिण में नारियय पूर्णिमा, बलेव और अवनि अवित्तम, राजस्थान में रामराखी और चूड़ाराखी या लूंबा बांधने का रिवाज है। रामराखी इसमें लाल डोरे पर एक पीले छींटों वाला फुंदना लगा होता है। 
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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