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धर्म-संसार
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प्रयागराज कुंभ मेला 2019
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कुंभ इतिहास
कुंभ में संन्यासियों के बीच संघर्ष का इतिहास
Thursday,January 31, 2019
प्रयागराज में इस तरह मिल गई गंगा और यमुना के साथ सरस्वती, जानिए रहस्य
प्रयागराज में दो साधुओं के श्राप से उलट गया अंधेर नगरी अनबूझ राजा का नगर
क्यों 144 वर्षों में होता है प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन?
4 कुंभ पर्व धरती पर और 8 देवलोक में मनाते हैं, जानिए 12 कुंभ पर्वों का रहस्य
सूर्य-चंद्र और बृहस्पति के योग से बनता हैं कुंभ पर्व का संयोग, जानिए रोचक जानकारी...
Tuesday, January 15, 2019
कुंभ का अतीत और उसकी महत्ता, जानिए क्यों कहा जाता है प्रयागराज को तीर्थराज?
Tuesday, January 15, 2019
आपने कहीं नहीं पढ़ी होगी कुंभ महापर्व ये 3 पौराणिक कथाएं....
Monday, January 14, 2019
कुंभ के मेले में प्रयाग राज का विशेष महत्व क्यों है, जानिए
Thursday, January 10, 2019
किन-किन शहरों में कुंभ का आयोजन होता है?
Wednesday, January 9, 2019
प्रयागराज कुंभ 2019 : प्रयागराज का अर्थ, कैसे और क्यों रखा इसका नाम इलाहाबाद, जानिए इतिहास
Monday, January 7, 2019
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मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान
वृषभ राशि के मंगल का 24 जुलाई 2026 को रोहिणी नक्षत्र से मृगशिरा नक्षत्र में गोचर होगा, जहां वे 12 अगस्त तक रहेंगे। मंगल के इस नक्षत्र परिवर्तन के चलते 3 राशि के लोगों को 12 अगस्त तक रहना होगा सावधान। चलिए जानते हैं कि किन राशि 3 राशियों को रहना होगा सावधान।
Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म
देकार्त के जीवन का सबसे बड़ा ध्येय यह था कि दर्शनशास्त्र को भी गणित (Mathematics) की तरह सटीक, अकाट्य और संदेह से परे बनाया जाए। वे एक ऐसा सार्वभौमिक सत्य खोजना चाहते थे, जिस पर कोई भी प्रश्नचिह्न न लगा सके। इसी विचार ने बुद्धिवाद (Rationalism) की नींव रखी। आइए, देकार्त के इस अद्भुत दार्शनिक चिंतन के 4 प्रमुख स्तंभों को गहराई से समझते हैं।
मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव
वृषभ राशि के मंगल का 24 जुलाई 2026 को रोहिणी नक्षत्र से मृगशिरा नक्षत्र में गोचर होगा, जहां वे 12 अगस्त तक रहेंगे। ज्योतिष की दुनिया में एक बड़ा हलचल भरा मोड़ आ चुका है- बुध ग्रह अपनी ही प्रिय राशि मिथुन में सीधे (मार्गी) चलने लगे हैं। अब जब बुद्धि और संवाद का कारक ग्रह सीधी चाल चलेगा, तो जाहिर है आपकी सोच, बातचीत और फैसलों की रफ्तार भी बदल जाएगी।
Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?
Raksha Bandhan 2026: हिन्दू पंचांग के अनुसार, रक्षा बंधन का पर्व प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में इसे मिठास और खुशियों का उत्सव माना गया है। यह भाई-बहन के प्रेम का पावन पर्व है। यहां जानें रक्षा बंधन 2026 कब है? जानें रक्षा बंधन 2026 की तारीख...
चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय
Chaturmas Astrology Remedies: हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार चातुर्मास यह चार महीनों का पवित्र काल भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने से प्रारंभ होकर देवउठनी एकादशी पर समाप्त होता है। यदि आप अपनी राशि के अनुसार चातुर्मास में कुछ विशेष उपाय करते हैं, तो जीवन में आ रही और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। यहां जानें 12 राशियों के लिए चातुर्मास के अचूक उपाय...
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Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 17 सितंबर 2026: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय
17 September 2026 Today Shubh Muhurat: क्या आप आज कोई नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं? या कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले हैं? ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य को सही मुहूर्त में करने से सफलता की संभावना बढ़ जाती है। 'वेबदुनिया' आपके लिए लेकर आया है 17 सितंबर, 2026 का विशेष पंचांग और शुभ-अशुभ मुहूर्त।
शनि और शुक्र का षडाष्टक योग, 5 राशियों के लिए अटके कार्य होंगे पूर्ण, मिलेगा भाग्य का साथ
ज्योतिष शास्त्र में शनि और शुक्र का संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्तमान में शनि ग्रह मीन राशि में और शुक्र ग्रह तुला राशि में विराजमान हैं। एक-दूसरे से छठे और आठवें भाव में स्थित होने के कारण शनि और शुक्र के मध्य षडाष्टक योग का निर्माण हुआ है।
Mahalakshmi Vrat 2026: कब से कब तक रहेगा महालक्ष्मी व्रत? जानें तिथि, महत्व और पूजा के खास नियम
भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माँ महालक्ष्मी का पावन व्रत आरंभ होता है। यह प्रसिद्ध व्रत गणेश चतुर्थी के ठीक चार दिन बाद शुरू होता है और निरंतर 16 दिनों तक रखा जाता है। उत्तर भारतीय पूर्णिमान्त कैलेंडर के अनुसार, इस 16 दिवसीय महालक्ष्मी व्रत का समापन आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को होता है।
Vishwakarma Jayanti : क्यों की जाती है भगवान विश्वकर्मा की पूजा, मशीन और औजारों का जयंती से क्या है संबंध?
Vishwakarma Jayanti 2026: विश्वकर्मा जयंती (विश्वकर्मा पूजा) हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो देवशिल्पी और ब्रह्मांड के पहले वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। विश्वकर्मा जयंती सूर्य कैलेंडर (कन्या संक्रांति) के अनुसार मनाई जाती है। जब सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करता है, उसी दिन यह पर्व मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 17 सितंबर, गुरुवार 2026 को मनाया जा रहा है। आइए जानते हैं इस दिन क्यों होती है भगवान विश्वकर्मा की पूजा? मशीन और औजारों का भगवान विश्वकर्मा जयंती से क्या है संबंध?
Kanya Sankranti 2026: कन्या संक्रांति कब है? जानें महत्व, पूजा विधि और इस दिन दान करने से मिलने वाले पुण्य
सूर्य के एक राशि से दूसरे राशि में गोचर करने को संक्रांति कहते हैं। संक्रांति एक सौर घटना है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार पूरे वर्ष में प्रायः कुल 12 संक्रान्तियाँ होती हैं और प्रत्येक संक्रांति का अपना अलग महत्व होता है। शास्त्रों में संक्रांति की तिथि एवं समय को बहुत महत्व दिया गया है 17 सितंबर 2026 को सूर्य सिंह से निकलकर कन्या राशि में गोचर करेगा। इस गोचर को कन्या संक्रांति कहते हैं।
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