वे ईश्वर के लिए गा रहे थे

और ईश्वर चाँदनी बरसा रहा था

रवींद्र व्यास|
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पंडित भीमसेन जोशी को भारत-रत्न मिलने पर एक संगीत सभा की याद
कहते हैं अपने को मिटाकर ही ईश्वर को पाया जा सकता है। उस दिन पंडितजी ईश्वर को ही पा रहे थे। और ईश्वर उनके लिए चाँदनी बरसा रहा था। उस रात हम सब सौभाग्यशाली थे कि उनके सुरों की चाँदनी में हम स्नान कर रहे थे। यह पुण्य स्नान था। हमने उस दिन पुण्य पाया।



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