सितंबर में कब मनेगी बाबू दोज? इस दिन किसकी होती है पूजा? जानिए पर्व से जुड़ी मुख्य बातें...
Babu Dooj 2026 : बाबू दूज (बाबू महाराज की दूज) लोक आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का एक अनूठा पर्व है। यह मुख्य रूप से भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाने वाली एक लोक परंपरा और पर्व है, जो राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों (विशेषकर डांग क्षेत्र और जिझौतिया समाज) में श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। यह पर्व क्षेत्रीय परंपराओं और पारिवारिक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
कहां और कब मनाया जाता है ये पर्व?
यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में मनाया जाता है। डांग क्षेत्र और जिझौतिया ब्राह्मण/समान समाज के बीच इस पर्व का विशेष धार्मिक और पारंपरिक महत्व है।
पर्व की मुख्य विशेषताएं और धार्मिक महत्व
इस दिन लोक देवता 'बाबू महाराज' की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। माना जाता है कि उनकी कृपा से परिवार में सुख, शांति और पशु धन की रक्षा होती है। माताएं और घर के वरिष्ठ सदस्य परिवार की खुशहाली, आरोग्य और भावी पीढ़ियों के कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।
इसलिए करते हैं बाबू महाराज की पूजा और व्रत
परिवार के सदस्य घर में सुख-शांति, आरोग्य और संतान/परिवार की वृद्धि के लिए बाबू महाराज की पूजा और व्रत करते हैं। परिवार के सभी सदस्यों को तिलक लगाकर कलावा (रक्षा सूत्र) बांधा जाता है। इस अवसर पर गांवों और कस्बों में सामूहिक पूजन, पारंपरिक भजनों का आयोजन और मेले जैसा उल्लास देखने को मिलता है।
कौन हैं बाबू महाराज? यहां है भव्य मंदिर
लोक मान्यताओं के अनुसार, बाबू महाराज मुगलों से वीरतापूर्वक लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। उनका मुकाबला ऐसा था कि उनकी बहादुरी देखकर दुश्मन भी हैरान रह गए थे। उनकी अदम्य वीरता और बलिदान को सम्मान देते हुए दिल्ली के बादशाह अकबर ने सन् 1563 ईस्वी में उनकी छतरी का निर्माण करवाया था। बाद में उसी पवित्र स्थल पर बाबू महाराज के भव्य मंदिर की स्थापना की गई।

