suvichar
✕

वैशाख मास को क्यों कहते हैं माधव मास, जल दान से मिलेगा यह पुण्य

Updated: शनिवार, 15 अप्रैल 2023 (15:54 IST)
हिन्दू कैलेंडर का दूसरा माह वैशाख माह है। विशाखा नक्षत्र के नाम पर इसका नाम वैशाख रखा गया है। 6 अप्रैल से प्रारंभ हुआ वैशाख माह 5 मई 2023 शुक्रवार तक चलेगा। 5 मई को वैशाख पूर्णिमा है। इस माह को माधव मास भी कहत हैं। पुराणों में इस माह की महिमा का वर्णन मिलता है। आओ जानते हैं इस माह में जल दान का महत्व।
 
वैशाख माह के खास दिवस : इस महीने गंगा उपासना, वरुथिनी एकादशी, मोहिनी एकादशी, अक्षय तृतीया, वैशाख पूर्णिमा जैसे महत्वपूर्ण त्योहार और व्रत आदि मनाए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी माह से त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। इसी वजह से इसका धर्मिक महत्व बढ़ जाता है। वैशाख अमावस्या पर शनि जयंती भी मनाई जाती है, इसलिए शनि देव तिल, तेल और पुष्प आदि चढ़ाकर पूजन करनी चाहिए।
 
माधव मास क्यों कहते हैं-
इस माह को माधव नाम से भी जाना जाता है। माधव विष्णु का एक नाम है। इस माह में विष्णु भगवान की पूजा का खासा महत्व है। वैशाख मास में भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। इस दौरान भगवान विष्णु की तुलसीपत्र से माधव रूप की पूजा की जाती है। स्कन्द पुराण के वैष्णव खण्ड अनुसार..
 
न माधवसमो मासो न कृतेन युगं समम्।
न च वेदसमं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समम्।।
अर्थात्: माधवमास, यानि वैशाख मास के समान कोई मास नहीं है, सतयुग के समान कोई युग नहीं है, वेदों के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है।
 
जल का दान का महत्व:
 
शास्त्रों के अनुसार इस माह में प्याऊ लगाना, छायादार वृक्ष की रक्षा करना, पशु-पक्षियों के खान-पान की व्यवस्था करना, राहगीरों को जल पिलाना जैसे पुण्य कार्य मनुष्य के जीवन को समृद्धि के रास्ते पर ले जाते हैं। 

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 16 सितंबर 2026: बुधवार का पंचांग और शुभ समय

परिवर्तिनी एकादशी 2026 का व्रत कब रखा जाएगा, क्या है इसका महत्व?

Ganesh Visarjan 2026: गणपति विसर्जन की सरल विधि, जानें पूजा से लेकर विदाई तक के नियम

गणेश चतुर्थी 2026: गणपति को तीसरे दिन कौन सा भोग लगाएं, प्रसाद चढ़ाएं

बुध-शनि का समसप्तक योग: 4 राशियों के लिए शुरू होगा शुभ समय, करियर और धन में मिल सकता है बड़ा लाभ

अगला लेख