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शीतलाष्टमी पूजन से पहले जान लीजिए 15 खास बातें

Updated: शुक्रवार, 2 जुलाई 2021 (09:50 IST)
इस वर्ष शीतलाष्टमी व्रत का आरंभ गुरुवार, 1 जुलाई को दोपहर 02.01 मिनट से हो गया है। अष्टमी तिथि 2 जुलाई को दोपहर 03:28 मिनट पर तक रहेगी। आइए जान लीजिए शीतला पूजन के बारे में 15 बातें-
 
* मां शीतला स्वच्छता की अधिष्ठात्री देवी हैं।
 
* सभी शीतल वस्तुओं पर इनका आधिपत्य है।
 
* मां शीतला को पथवारी भी कहते हैं।
 
* देवी मां रास्ते में भक्तों को सुरक्षित रख पथभ्रष्ट होने से बचाती हैं।
 
* गलत मार्ग पर जाने से पहले अदृश्य रूप से चेतावनी देती हैं।
 
* बसौड़ा वाले दिन सुबह ठंडे पानी से नहाना चाहिए।
 
* जिन माताओं के बच्चे अभी माता का दूध पीते हो उन्हें बसौड़ा के दिन नहाना नहीं चाहिए।
 
* मां शीतला को समर्पित बसौड़ा पर्व को शीतला सप्तमी कहा जाता है, मतातंर से कुछ लोग इसे अष्टमी के दिन बनाते हैं।
 
* रोगों को दूर करने वाली मां शीतला का वास वट वृक्ष में माना जाता है, अतः इस दिन वट पूजन भी किया जाता है।
 
* इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलता है और न ही घर में ताजा भोजन बनाया जाता है।
 
* एक दिन पूर्व भोजन बनाकर रख दिया जाता है और अगले दिन शीतला पूजन के उपरांत सभी बासी भोजन ग्रहण करते हैं। यह ऐसा व्रत है जिसमें बासी भोजन चढ़ाया व ग्रहण किया जाता है।
 
* गुड़गांव में मां शीतला का मंदिर है। महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य यहीं पर कौरव और पांडवों को अस्त्र-शस्त्र विद्या का ज्ञान दिया करते थे।
 
* इस दिन विशेष ध्यान रखा जाता है कि परिवार का कोई भी सदस्य गलती से भी गरम भोजन न ग्रहण करें।
 
* मां शीतला यश देती हैं, गलत राह पर जाने से रोकती हैं।
 
* इस व्रत से संकटों से मुक्ति मिलती है, यश-कीर्ति-मान-सम्मान में वृद्धि होती है।

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