श्रावण मास में कब रहेंगे प्रदोष व्रत? कैसे करें पूजन, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व
August 2026 Pradosh Vrat: प्रदोष व्रत हिन्दू धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक अत्यंत पवित्र उपवास है। यह व्रत प्रत्येक माह के दोनों पक्षों (कृष्ण और शुक्ल पक्ष) की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। शाम के समय प्रदोष काल में शिव पूजा का विशेष विधान है। पहला 10 अगस्त 2026 सोमवार को श्रावण कृष्ण पक्ष का सोम प्रदोष व्रत है और दूसरा 25 अगस्त 2026, मंगलवार को श्रावण शुक्ल पक्ष का भौम प्रदोष व्रत है। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सभी प्रकार के दोषों से मुक्ति मिलती है।
पूजा के शुभ मुहूर्त
10 अगस्त (सोम प्रदोष):
ब्रह्म मुहूर्त: प्रात: 04:49 से 05:34 तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:18 से 01:09 तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:52 से 03:44 तक
25 अगस्त (भौम प्रदोष):
25 अगस्त (भौम प्रदोष):
ब्रह्म मुहूर्त: प्रात: 04:51 से 05:36 तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:15 से 01:06 तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:47 से 03:37 तक
आइए जानते हैं इसकी सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
सुबह का संकल्प और स्नान
प्रातःकाल/ सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र, यदि संभव हो तो सफेद या पीले पहनें। हाथ में जल लेकर भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लें। सुबह सामान्य पूजा करें।
शाम की तैयारी (प्रदोष काल)
सूर्यास्त से थोड़ा पहले यानी शाम को सूर्यास्त से करीब 1 घंटा पहले दोबारा स्नान करें या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ हो जाएं। पूजा स्थल पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठें।
शिवलिंग का अभिषेक
मुख्य पूजा के रूप में पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके बाद शुद्ध जल चढ़ाएं। भगवान शिव को चंदन का तिलक लगाएं।
सामग्री अर्पित करना और मंत्र जाप
महादेव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और अक्षत (साबुत चावल) चढ़ाएं। माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। इसके बाद 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जप करें।
कथा और आरती
प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। धूप-दीप से शिवजी की आरती करें और भोग लगाएं। अगले दिन सुबह सूर्योदय के बाद पारण करें या व्रत खोलें।
प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अलग-अलग दिनों को पड़ने वाले प्रदोष व्रत का फल भी अलग होता है। शास्त्रों के अनुसार, जब सावन सोमवार और प्रदोष व्रत एक साथ पड़ें, तो इसे भगवान शिव और माता पार्वती की असीम कृपा पाने का महा संयोग मानना चाहिए।
इस दिन की गई श्रद्धापूर्ण पूजा से जीवन में सुख-शांति आती है। प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सभी प्रकार के दोषों से मुक्ति मिलती है।

