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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत

Updated: सोमवार, 1 मार्च 2021 (14:42 IST)
प्रत्येक माह में दो चतुर्थी होती है। इस तरह 24 चतुर्थी और प्रत्येक तीन वर्ष बाद अधिमास की मिलाकर 26 चतुर्थी होती है। सभी चतुर्थी की महिमा और महत्व अलग-अलग है। अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं और पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। कल यानी 2 मार्च मंगलवार को संकष्टी चतुर्थी है जिसे द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी भी कहा गया है।
 
 
1. पौराणिक मान्यता के अनुसार द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी तिथि पर पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-पाठ करने और व्रत रखने से भक्तों पर विघ्नहर्ता भगवान गणेश की विशेष कृपा बनती है।
 
2. हिन्दू धर्म में फाल्गुन माह की चतुर्थी तिथि को बहुत ही शुभ माना जाता है, इस दिन भगवान गणेश के 32 रुपों में से उनके छठे स्वरूप की पूजा की जाती है।
 
3. मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने और व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन की सभी परेशानियों का अंत हो जाता है। 
 
4. विधिवत व्रत रखने पौर पूजा करने से सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
 
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा मुहूर्त
2 मार्च, मंगलवार सुबह 05:46 से चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगी जो  3 मार्च, सुबह 02:59 तक रहेगी।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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