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ज्येष्ठ मास का पहला बड़ा मंगल क्यों है खास

Updated: मंगलवार, 1 जून 2021 (20:06 IST)
उत्तर प्रदेश में ज्येष्ठ मास के पहले मंगल को बड़ा मंगलवार मानते हैं। हालांकि इस माह के सभी मंगल को बड़ा मंगल ही मानते हैं। ज्येष्ठ माह के सभी मंगलवार को हनुमानजी की पूजा का महत्व बड़ जाता है। इस माह हनुमानजी का दर्जा श्रीराम से भी बड़ा माना जाता है। ज्योतिषियों के मुताबिक  बड़ा मंगल के दिन गुड़, गेंहू, मीठे पूड़ी का प्रसाद चढ़ाना चाहिए। हनुमान जी इस दिन दान का विशेष फल देते हैं। आओ जानते हैं कि आखिर ज्येष्ठ माह में बड़ा मंगलवार मनाए जाने की परंपरा कैसे प्रारंभ हुई।
 
 
कहते हैं कि नवाब शुजाउद्दौला की बेगम और मुगल खानदान की बेटी बेगम आलिया ने लखनऊ के अलीगंज में पुराने हनुमानजी के मंदिर का निर्माण कराया था। 1792 से 1802 में इस मंदिर का निर्माण कार्य संपन्न हुआ था। इस मंदिर की स्थापना के 2-3 वर्षों बाद ही महामारी फैले थी जिसे रोकने के लिए बेगम ने बजरंगबलीजी का सुमिरन करवाया तो महामारी समाप्त हो गई। सुमिरन के आयोजन का दिन मंगलवार और माह ज्येष्ठ माह था। 
 
तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि यहां पूरे ज्येष्ठ माह हनुमानजी की पूजा और आराधना होती है। यहां जगह जगह भंडारे के आयोजन होता है जिसमें हिंदू-मुस्लिम बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। मंदिर के गुंबद पर चांद का निशान एकता और भाईचारे की मिसाल पेश करता है। 
 
यह भी कहा जाता है कि इस परंपरा की शुरुआत लखनऊ में नवाब सदाअतअली खां ने करवाई थी। बताया जाता है कि एक बार नवाब बीमार हो गए थे तो उनके बेहतर स्वास्थ के लिए मां छतर कुंवर ने हनुमानजी से मन्नत मांगी थी। मन्नत पूरी होने से नवाब ने अलीगंज में हनुमान मंदिर बनवाया था और पूजा अर्चना करवायी थी। तभी से यह परंपरा जारी है। मान्यता है कि इन दिनों किसी भी हनुमानजी के मंदिर में जाकर पूजा करने से भक्तों की सभी तरह की मनोकामना पूर्ण होती है। 

एक अन्य कथा के अनुसार कुछ लोगों के अनुसार बड़ा मंगलवार की शुरुआत करीब 400 साल पहले अवध के नवाब ने की थी। नवाब मोहम्मद अली शाह का बेटा एक बार गंभीर रूप से बीमार हो गया। उनकी बेगम रूबिया ने कई जगह उसका इलाज करवाया, लेकिन वह ठीक नहीं हुआ। लोगों ने उन्हें बेटे की सलामती के लिए लखनऊ के अलीगंज स्थित पुराने हनुमान मंदिर में मन्नत मांगने को कहा। यहां मन्नत मांगने पर नवाब का बेटा स्वस्थ हो गया। इसके बाद नवाब की बेगम रूबिया ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। वहीं नवाब ने ज्येष्ठ की भीषण गर्मी के दिनों में प्रत्येक मंगलवार को पूरे शहर में जगह-जगह गुड़ और पानी का वितरण करवाया और तभी से इस परंपरा की शुरुआत हुई।
 
एक अन्य कथा के अनुसार जाटमल नाम के व्यापारी ने हनुमानजी से मन्नत मांगी थी कि अगल उनका सारा इत्र और केसर बिक जाएगा तो वह हनुमानजी का भव्य मंदिर बनवाएंगे। नवाब वाजिद अली शाह ने कैसरबाग बसाने के लिए जाटमलजी से उनका सारा इत्र और केसर खरीद लिया। मन्नत पूरी होने कर जाटमलजी ने ज्येष्ठ माह के प्रथम मंगलवार के दिन हनुमानजी की प्रतिमा स्थापना करवायी। तब से ज्येष्ठ का हर मंगलवार यहां पर बड़ा मंगलवार माना जाता है। 

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