suvichar
✕

हिन्दी कविता : यादें

Updated: मंगलवार, 11 अगस्त 2020 (15:16 IST)
ढ़ीठ होती हैं यादें, बेबाक होती हैं यादें
बेवक्त की बारिश सी सनकी होती हैं यादें
दुआ मरहम से भी लाइलाज होती हैं
पुराने ज़ख्मों सी ज़िद्दी होती हैं यादें
 
कसमसाती हैं यादें, छटपटाती है यादें
मुंह को कसैला कर जाती हैं कुछ यादें
दिल के तहख़ाने में घुट-घुट के जीती हैं
मर मिटने की दुआएं मांगती हैं कुछ यादें
 
गुदगुदाती है यादें, मुस्कुराती हैं यादें
शैम्पेन के बुलबुलों सी उमड़ती हैं यादें
वक्त की परत को सरसर चीरती हैं
दिल में कोंपलों सी फूटती हैं यादें
 
लुभाती हैं यादें, रिझाती हैं यादें
पुरानी गलियों से पुकारती हैं यादें
किसी की आंखों में झिलमिल चमकती हैं
और किसी के आंखों से बरसती हैं यादें
 
लहलहाती हैं यादें, हरहराती हैं यादें
रिश्तों की उधेड़बुन में बनती दरकती हैं यादें
धड़कनों में चलती हैं, सांसों में बहती हैं
जब तक जान, साथ रहती हैं यादें। 
 
लेखक के बारे में
देवयानी एस.के.
लेखिका हिन्दी साहित्य, इतिहास, शायरी तथा सिनेमा में ख़ास रूचि रखती हैं।.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

नया भारत, नई उड़ान: मोदी युग में आत्मविश्वास का नया शिखर

17 सितंबर जन्मदिन पर विशेष: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में 25 दिलचस्प बातें

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

अगला लेख