कांग्रेस हुई आक्रामक, पर देर से खुली नींद...

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नौ चरणों के मतदान के आज सात चरण पूरे होने वाले हैं और अब जाकर कहीं की कुंभकर्णी नींद खुली है। पार्टी ने पर जारी अपनी में मोदी समेत अपने सभी राजनीतिक विरोधियों पर निशाने साधे हैं लेकिन कांग्रेस का यह आक्रामक प्रचार तब हो रहा है जबकि प्रचार के समय का पूरा हाथी निकल चुका है और मात्र दो चरणों की पूंछ ही बाकी रह गई है।


मोदी के उद्योगपति गौतम अदाणी के साथ संबंधों और उन्हें सरकारी जमीन देने के मामले पर कांग्रेस ने अपनी फैक्टबुक में कहा है ‍कि मोदी ने अदाणी को एक रुपए से लेकर 32 रुपए प्रति वर्ग मील तक की 15,946,32 एकड़ जमीन दी गई है। इस जमीन को देने में सभी नियमों-कानूनों को ताक पर रख दिया गया है। इसकी तुलना में मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, टीसीएस, फोर्ड ‍इंडिया और टॉरेंट पावर को प्रति वर्गमील जमीन खरीदने के लिए 670 गुणा से लेकर 6000 गुणा तक अधिक धनराशि अदा करनी पड़ी। गुजरात सरकार की रिपोर्ट्‍स के अनुसार अदाणी के अलावा और किसी कंपनी कौड़ियों के मोल जमीन नहीं दी गई।
मोदी के राज्य में अदाणी की सम्पत्ति खूब फली फूली। वर्ष 2002 में उनके पास जहां 76 करोड़ 50 लाख डॉलर की राशि थी वहीं 2013 में यह सम्पत्ति बढ़कर 8.8 अरब डॉलर हो गई। अब आप ही तय कर लीजिए कि मोदी उद्योग उन्मुख हैं या अदाणी उन्मुख ?


इसी तरह पंजाब में अकाली दल-भाजपा का भ्रष्टाचार कम नहीं है। मुख्यमंत्री बादल का कहना है कि भारत से कोई भी लोकपाल भ्रष्टाचार समाप्त नहीं कर सकता है। उन्हें अच्छी तरह पता है कि वे क्या कह रहे है। होटल और ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में उनके परिवार का निवेश इतना ज्यादा है कि कई कंपनियों के नाम पर कामकाज चल रहा है। उनके दो मंत्री और एक विधायक भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। राज्य के एक पूर्व वित्त मंत्री का कहना है कि पंजाब देश का सर्वाधिक भ्रष्ट राज्य है। जो लोग राज्य को लूट रहे हैं, उन्हें मंत्रियों से सरकारी संरक्षण मिल रहा है। आश्चर्य नहीं कि बादल भी लोकपाल की खिल्ली उड़ाते हों।

पंजाब के अकाली-भाजपा शासन को उसके ड्रग रैकेट के लिए भी जाता जाता है। पहले तो राज्य सरकार ने पंजाब के इस 700 करोड़ रुपए के ड्रग रैकेट में मंत्रियों के शामिल होने की बात ही खारिज कर दी थी लेकिन जब राज्य के पूर्व डीजीपी (जेल) शशिकांत ने इन मंत्रियों और विधायकों को रैकेट चलाने वाला बताया तब बात को स्वीकार किया गया। राज्य के 75 फीसदी युवा नशे के गुलाम हैं और 65 फीसद परिवार इससे प्रभावित हुए हैं। क्या पंजाब को ऐसी सरकार की जरूरत है?
मध्यप्रदेश में भाजपा के विकास का फोटोशॉप मॉडल सामने आया है। राज्य सरकार का दावा है कि इसने बीमारू राज्य को स्वस्थ बनाया है लेकिन तीन बुनियादी जरूरतों के मुद्‍दों पर राज्य सरकार को सफल नहीं कहा जा सकता है। बिजली, पानी और सड़क के मुद्‍दों पर सरकार कुछ नहीं कर पाई है। राज्य के मुख्यमंत्री को विकास दिखाने के लिए दिल्ली-कोलकाता हाईवे और ईरान के खेतों को अपने राज्य में बताना पड़ा। ‍आखिर इससे ज्यादा फोटोशॉप विकास भी संभव नहीं है?
फैक्टबुक में कांग्रेस ने यूपीए और एनडीए के आर्थिक रिपोर्ट कार्ड की भी तुलना दर्शाई है। ऐसा कहा जा रहा है कि यूपीए के शासन काल में भारत का विकास रुक गया था। एनडीए ने वर्ष 1998 से 2003 के दौरान देश की जीडीपी को 423.2 बिलियन से 617.7 बिलियन तक पहुंचाया था, इसके विपरीत यूपीए 1 (2004-2009) के दौरान देश का जीडीपी 617.7 बिलियन से 1224.1 ‍बिलियन हो गया था। कहने का अर्थ जीडीपी विकास दोगुना हो गया था।
यूपीए 2 के दौरान सख्त वैश्विक आर्थिक पर्यावरण के बावजूद जीडीपी 1224.1 बिलियन से 1841.7 बिलियन वर्ष 2013 के अंत तक हो गया था। यूपीए सरकार के दौरान 10 वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था तीन गुना बढ़ गई और यह आंकड़े अपनी कहानी खुद कहते हैं।



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