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नवरात्रि : शरीर के 9 छिद्र और 9 संयम, जानिए व्रत में क्यों हैं जरूरी

Updated: रविवार, 11 अक्टूबर 2020 (08:35 IST)
हिन्दू धर्म में वर्ष में चार नवरात्रियां आती हैं। माघ, चैत्र, आषाढ और अश्विन माह। चैत्र माह की नवरात्रि को बसंत नवरात्रि और अश्विन माह की नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहते हैं। बाकी बची दो आषाढ़ और पौष-माघ माह की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। चार नवरात्रियों में कुल 36 दिन होते हैं। इन दिनों में शारीरिक और मानसिक रूप से पवित्र और शुद्ध बने रहने की जरूर होती है। 
 
 
9 छिद्र : हमारे शरीर में 9 छिद्र हैं। दो आंख, दो कान, नाक के दो छिद्र, दो गुप्तांग और एक मुंह। उक्त नौ अंगों को पवित्र और शुद्ध करेंगे तो मन निर्मल होगा और छठी इंद्री को जाग्रत करेगा। नींद में यह सभी इंद्रियां या छिद्र लुप्त होकर बस मन ही जाग्रत रहता है। वर्ष की 36 नवरात्रियों में उपवास रखने से जहां अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से भीतरी सफाई हो जाती है वहीं मन में पवित्रता का जन्म होता है।
 
9 संयम : इन नौ दिनों में कम से कम 9 तरह के संयम की जरूरत होती है।
 
1.आहार संयम : इसमें मांस-भक्षण करना, तामसिक और राजसी भोजन करना वर्जित है। सात्विक भोजन एक समय का कर सकते हैं अन्यथा फलाहार ही लें।
 
2. मद्यमान : इन दिनों में किसी भी प्रकार का नशा नहीं कर सकते हैं। जैसे मद्यपान, सिगरेट, तम्बाकू आदि।
 
3.स्‍त्रिसंग शयन : इन दिनों में यह कार्य करना पाप माना जाता है।
 
4.नकारात्मक विचार : यह पवित्र दिन होते हैं। इन दिनों में पूरे नौ दिनों तक माता की ‍भक्ति में ही रहने से किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचार नहीं आते हैं।
 
6. वाणी संयम : कई लोग इन 9 दिनों मौन रहते हैं। मौन नहीं रह सकते हैं तो कम से कम मुंह से किसी भी प्रकार के कटु वचन, बुरे वचन या गाली आदि का प्रयोग नहीं किया जाता।
 
7. मानसिक संयम : नौ दिनों में क्रोध, मद, लोभ, आसक्ति, रोना, हंसना और अन्य किसी भी प्रकार के उद्वेगपूर्ण भाव रखना नहीं चाहिए। मन को काबू में रखें।
 
8. वर्जित साधनाएं : कई लोग इन नौ दिनों में तांत्रिक साधना या अन्य तरह की अघोर साधना करते हैं जो कि सामान्य लोगों के लिए वर्जित है। 
 
9. गलतियों से बचें : यदि आप माता की साधना, पूजा आदि करना नहीं जानते हैं तो भक्ति ही सर्वोपरि है। आप इन गलतियों से बचें। पूजा-पाठ में गलतियां न हो इसका ध्यान रखें। पूजा स्थल और घर में गंदगी बिल्कुल भी नहीं होनी चाहिए।  व्रत रखने वाले व्यक्ति को गंदे या बिना स्नान किए वस्त्र नहीं पहनने चाहिए। नवरात्रि व्रत के दौरान दिन में नहीं सोना चाहिए। खाने में अनाज और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। कुट्टू का आटा, समारी के चावल, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, सेंधा नमक, फल, आलू, मेवे, मूंगफली का सेवन करें। अगर दुर्गा चालीसा, मंत्र, सप्तशती पाठ या चण्डी पाठ पढ़ रहे हैं तो इसके नियमों का पालन करें। पढ़ते हुए बीच में किसी दूसरे से बात न करें। नवरात्रों में व्यक्ति को दाढ़ी, नाखून व बाल नहीं कटवाने चाहिए।
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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