अखंड दीपक जलाने के कारण, फायदे, अनजाने रहस्य और नियम

narak chaturdashi
पुनः संशोधित मंगलवार, 27 सितम्बर 2022 (11:35 IST)
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हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले दीपक जलाए जाते हैं। दो तरह के दीपक जलाते हैं। एक कर्मदीप जो सिर्फ पूजा के दौरान जलाते हैं और दूसरा अखंड दीप जो तब तक जलाते हैं जब तक कि त्योहार चलता है। नवरात्रि में नौ दिनों तक जलाया जाता है। क्यों जलाते हैं नवरात्रि में अखंड दीपक? क्या है इसके पीछा का रहस्य? अखंड दिया जलाने के क्या है नियम?

अखंड दीपक जलाने के अनजाने रहस्य | Unknown secrets of lighting a monolithic lamp or akhand Deepak:

- दीप प्रकाश का द्योतक है और प्रकाश ज्ञान का। परमात्मा से हमें संपूर्ण ज्ञान मिले इसीलिए दीप प्रज्वलन करने की परंपरा है।

- जिस प्रकार दीप की ज्योति हमेशा ऊपर की ओर उठी रहती है, उसी प्रकार मानव की वृत्ति भी सदा ऊपर ही उठे, यही दीप प्रज्वलन का अर्थ है।

- समस्त कल्याण की चाह रखने वाले मनुष्य को दीप जलाते समय दीप मंत्र अवश्य पढ़ना चाहिए।

- पंच तत्वों में से एक महत्वपूर्ण तत्व अग्नि का अंश है दीपक। यह अग्नि संपूर्ण संसार में व्याप्त है जिससे जीवन चलता है।

- प्राचीनकाल में दीपक ही उजाने का एकमात्र स्रोत हुआ करता था।

क्यों जलाते हैं नवरात्रि में अखंड दीपक क्या है इसके फायदे | Why do we light a monolithic lamp during Navratri? jalane ke fayde:

- देवी मां को प्रसन्न करने और मनवांछित फल पाने के लिए देशी गाय के घी से अखंड ज्योति जलाते हैं।

- अखंड दीपक जलाने से घर में सुख-शांति, समृद्धि बनी रहती है और सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं।

- अखंड दीपक में जल रहे घी और कपूर की सुगंध से मनुष्य का श्वास और नर्वस सिस्टम बढ़िया रहता है।

- अखंड दीप जलाने से मन-मस्तिष्‍क में नकारात्मक विचार हावी नहीं होते हैं।

- अखंड दीपक जलते रहने से घर में कलह या झगड़े नहीं होते और वातावरण शांत बना रहता है।

- अखंड दीपक जलाने से घर का वास्तुदोष भी दूर होता और भाग्योदय होता है।

- नवरात्रि में अखंड ज्योति की लौ पूर्व दिशा की ओर रखने से आयु में वृद्धि होती है।

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दीपक की लौ पश्चिम दिशा की ओर रखने से दु:ख बढ़ता है।

- दीपक की लौ उत्तर दिशा की ओर रखने से धनलाभ होता है।

- दीपक की लौ दक्षिण दिशा की ओर रखने से हानि होती है।

- अखंड ज्योति की गर्मी दीपक से 4 अंगुल चारों ओर अनुभव होनी चाहिए। ऐसा दीपक भाग्योदय का सूचक होता है।

- दीपक की लौ सुनहरी जलनी चाहिए, जिससे आपके जीवन में धन-धान्य की वर्षा होती है और व्यापार में प्रगति होती है।

- अगर अखंड ज्योति बिना किसी कारण के स्वयं बुझ जाए तो घर में आर्थिक तंगी आने की संभावना रहती है।

- मिट्टी के दीपक में अखंड ज्योति जलाने से आर्थिक समृद्धि आती है और चारों दिशाओं में आपकी कीर्ति का बखान होता है।

- नवरात्रि में दीपक जलाए रखने से घर-परिवार में सुख-शांति एवं पितृ शांति रहती है।

- नवरात्रि में घी एवं सरसों के तेल का अखंड दीपक जलाने से त्वरित शुभ कार्य सिद्ध होते हैं।

- नवरात्रि में विद्यार्थियों को सफलता के लिए घी का दीपक जलाना चाहिए।

- अगर आप वास्तु दोष से परेशान है तो उसे दूर करने के लिए वास्तु दोष वाली जगह पर तिल्ली के तेल का दीपक जलाकर रखना चाहिए।

- शनि के कुप्रभाव से मुक्ति के लिए नवरात्रि में तिल्ली के तेल की अखंड जोत शुभ मानी जाती है।

- अखंड ज्योति जलाने के बाद आप उसे अकेला नहीं छोड़ सकते हैं और अगर ये ज्योति बुझ जाए तो अपशगुन होता है।

- अखंड ज्योति जलाने से पहले मन में संकल्प लें और मां देवी से प्रार्थना करें कि हमारी मनोकामना जल्द पूर्ण हो जाएं।

- जलाने से पहले हाथ जोड़कर श्रीगणेश, देवी दुर्गा और शिवजी की आराधना करें।

- यदि आपके पास पीतल का दीपक न हो तो आप मिट्टी के बड़े दीपक का भी उपयोग कर सकते हैं।

- मिट्टी के दीपक में ज्योति जलाने से पहले दीपक को 1 दिन पहले पानी में भिगो दें और उसे पानी से निकालकर साफ कपड़े से पोछकर सुखा लें।

- दीपक को चौकी या पर में रखकर ही जलाएं। कभी भी भूमि पर न रखें। माता के सामने यदि आप जमीन पर दीपक रख रहे हैं तो अष्टदल बनाकर रखें। अष्टदल आप गुलाल या रंगे हुए चावलों का बना सकते हैं।

- अखंड ज्योति की बाती रक्षासूत्र यानि कलावा से बनाई जाती है। सवा हाथ का रक्षासूत्र या नाड़ा लेकर उसे बाती की तरह उपयोग में लें।

- अखंड ज्योति जलाने के लिए शुद्ध घी का उपयोग करें। यदि घी न हो तो आप तिल या सरसों के तेल का भी दीपक जला सकते हैं। यह तेल मिलावटी नहीं होना चाहिए।

- अखंड ज्योति को देवी मां के दाईं ओर रखा जाना चाहिए लेकिन यदि दीपक तेल का है तो उसे बाईं ओर रखना चाहिए।

- अखंड दीपक की लौ को हवा से बचाने के लिए कांच की चिमनी से ढककर रखना चाहिए।

- संकल्प समय खत्म होने बाद दीपक को फूंक मारकर या गलत तरीके से बुझाना सही नहीं है, बल्कि दीपक को स्वयं बुझने देना चाहिए।

- अखंड ज्योति को आग्नेय कोण में रखना शुभ माना जाता है।

- ध्यान रखें कि पूजा के समय ज्योति का मुख पूर्व या फिर उत्तर दिशा में होना चाहिए।

- दीपक में बार-बार बाती नहीं बदलनी चाहिए। दीपक से दीपक जलाना भी अशुभ माना जाता है। ऐसा करने से रोग में वृद्धि होती है और मागंलिक कार्यों में बाधाएं आती है।

-
अखंड ज्योत जलाते वक्त यह मंत्र पढ़ें

ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कृपालिनी
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते।।


या

दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति जनार्दन:
दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नमोस्तुते।

दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन:।
दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते।।

शुभ करोतु कल्याणामारोग्यं सुख संपदा
दुष्ट बुद्धि विनाशाय च दीपज्योति: नमोस्तुते।।

शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते।।



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