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योगी सरकार के 100 दिन : गहरी हुई चुनौतियां

Updated: रविवार, 18 जून 2017 (14:00 IST)
लखनऊ। जनाकांक्षाओं और उम्मीदों का भारी बोझ लेकर सत्ता में आई उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अगले सप्ताह अपने कार्यकाल के 100 दिन पूरे कर लेगी। इस अर्से में कानून-व्यवस्था और किसानों की कर्जमाफी को लेकर विपक्ष के निशाने पर रही इस सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं।
 
किसानों की कर्जमाफी भाजपा का अहम चुनावी मुद्दा था। केन्द्र सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिलने के बीच अचानक आए 36 हजार 369 करोड़ रुपए के इस बोझ को उतारने के लिए वित्त विभाग तरकीबें ढूंढ रहा है। वहीं सातवें वेतन आयोग को लागू करने में आने वाला 34 हजार करोड़ रपये का अतिरिक्त व्ययभार भी सरकार को उठाना है। इसके अलावा, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे जैसी मेगा परियोजनाओं के लिये धन उपलब्ध कराना भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।
 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट आदेशों के बावजूद राज्य सरकार 15 जून तक केवल 63 प्रतिशत सड़कों को ही गड्ढामुक्त कर सकी है। अब सरकार के सामने विद्याथर्यिों को नि:शुल्क लैपटाप बांटने की भी चुनौती है।
 
कानून-व्यवस्था दुरस्त करने के वादे के साथ प्रदेश की सत्तर में आई योगी सरकार के गठन के बाद आपराधिक वारदात में बढ़ोतरी हुई है। खासकर सहारनपुर में हुए जातीय संघर्ष से सरकार को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। यह स्थिति उन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए कड़ी चुनौती है, जिन पर वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक लिहाज से अतिसंवेदनशील उत्तर प्रदेश में भाजपा की छवि को बेहतर बनाए रखने की जिम्मेदारी है।
 
मुख्यमंत्री योगी ने सत्ता सम्भालते ही प्रदेश से अपराध खत्म करने तथा 'सबका साथ, सबका विकास' करने का वादा किया था। हालांकि अब वह और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों का कहना है कि उन्हें जंगल राज वाला प्रदेश मिला था, जिसे सुधारने में समय लगेगा।

योगी सरकार के सामने प्रदेश में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में भी भाजपा की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की चुनौती है। राज्य निर्वाचन आयोग ने निकाय चुनावों के लिये जोर-शोर से तैयारियां की थीं लेकिन सरकार ने पिछड़ा बहुल सीटों के लिए हुए रैपिड सर्वे के सही नहीं होने की बात कहकर उसे टाल दिया। ये चुनाव जुलाई में होने थे, मगर अब इनके अक्तूबर में होने की सम्भावना है।
 
भाजपा के चुनाव घोषणापत्र में विद्यार्थियों को लैपटाप वितरण का वादा किया गया था लेकिन यह योजना कब शुरू होगी, इस बारे में अभी तक कोई तारीख तय नहीं की गयी है। राज्य सरकार जहां 'सबका साथ, सबका विकास' की बात कर रही है, वहीं विपक्षी दल इसे सरकार का ढकोसला मात्र करार दे रहे हैं।
 
बसपा मुखिया मायावती का आरोप है कि मुख्यमंत्री क्षत्रिय हैं और प्रदेश में केवल क्षत्रिय बिरादरी के लोगों का ही दबदबा हो गया है। दलित तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ-साथ ब्राहमणों को भी अत्याचार का सामना करना पड़ रहा है।
 
सपा अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव योगी सरकार पर तंज करते हुए कहते हैं कि मौजूदा सरकार पूर्ववर्ती सपा सरकार के हर काम की जांच करा रही है। वह कुछ काम भी करेगी, या सिर्फ जांच ही कराती रहेगी। (भाषा) 
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