गुजरात कांग्रेस को कौन बचाएगा, BJP में गए 11 विधायक, राष्ट्रपति चुनाव में 7 विधायकों ने की क्रॉस वोटिंग

Congress
Last Updated: शुक्रवार, 22 जुलाई 2022 (23:56 IST)
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में जब से नए प्रभारी डॉ. रघु शर्मा आए हैं, में हड़कंप मचा हुआ है। इस बीच अब तक 11 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी है। जब यह बात हाईकमान तक पहुंची तो राजस्थान के मुख्यमंत्री को कांग्रेस की कमान सौंप दी। हाईकमान ने गुजरात के नेताओं को दिल्ली बुलाया और उनको साफ शब्दों में कहा कि अंदर की गुटबाजी को भूलकर कुछ ऐसा करो जिससे कि 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को जीत मिल जाए।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव के समय भी कांग्रेस में काफी खलबली मची थी। एनसीपी के विधायक कांधल जडेजा ने खुद क्रॉस वोटिंग की बात कही। हालांकि एनसीपी और कांग्रेस का गठबंधन होने से इस बात को लेकर भी हड़कंप मचा था, लेकिन जब वोटिंग खत्म हुई तब पता चला कि भारतीय ट्राइबल पार्टी के दोनों विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी। ऐसी चर्चाएं भी चलीं कि कांग्रेस के गठबंधन वाले पक्ष और कांग्रेस के खुद के विधायक भी क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। ठीक वैसा ही हुआ भी, कांग्रेस के सात विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की।

एक तरफ कांग्रेस ने गुजरात की 40 आदिवासी सीटें हासिल करने के लिए आदिवासी सत्याग्रह अभियान चलाया हुआ है तो दूसरी ओर उमरगाम से लेकर अंबाजी तक 10 हजार से ज्यादा चौपाल हो रही है। खुद राहुल गांधी ने दाहोद में आदिवासी सत्याग्रह की एक ऐप लांच की थी, लेकिन अब इस क्रॉस वोटिंग से लगता है कि कांग्रेस को आदिवासी वोट बटोरने के सपने देखने पड़ेंगे।

कांग्रेस में जो विधायक क्रॉस वोटिंग कर चुके हैं, उनके नाम चर्चा में आने के बाद कांग्रेस बौखलाई हुई है। कांग्रेस के पालनपुर के विधायक महेश पटेल, पाटण के विधायक किरीट पटेल, जंबुसर के विधायक संजय सोलंकी, हार्दिक पटेल के खास साथी और धोराजी के विधायक ललित वसोया, विसावदर के विधायक हर्षद रिबडिया और कालावड के विधायक चिराग कालरिया का नाम क्रॉस वोटिंग करने में आगे आया।

जब उनसे टेलीफोन पर संपर्क किया तो फोन स्वीच ऑफ आ रहा था, बाद में किरीट पटेल और महेश पटेल ने खुलासा किया कि उन्होंने क्रॉस वोट नहीं डाले, यह सब मात्र एक अफवाह है। तो आखिर कांग्रेस के 64 विधायकों में से किसने क्रॉस वोटिंग की। यह सवाल अभी हाईकमान को भी सता रहा है।

गुजरात में नवंबर में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। 11 विधायक पहले ही पार्टी छोड़कर बीजेपी में चले गए हैं। गठबंधन वाले पक्ष भी साथ नहीं दे रहे हैं। कांग्रेस की हालत दिन-ब-दिन बदतर हो रही है। अब एक ही सवाल है कि आखिर कांग्रेस को कौन बचा सकता है।



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