कश्मीर में हाड़ कंपा देनी वाली सर्दी, डल झील जमी

सुरेश एस डुग्गर| पुनः संशोधित सोमवार, 9 दिसंबर 2019 (19:27 IST)
जम्मू। के वैज्ञानिकों का कहना है कि कश्मीर के मौसम पर 'पश्चिमी गड़बड़ियां' प्रभाव छोड़ रही हैं। हालांकि अब इन 'पश्चिमी गड़बड़ियों' के प्रभाव में जम्मू भी आ रहा है जहां रात का न्यूनतम अब रिकॉर्ड बनाने की ओर है। वैसे भी कश्मीर में सर्दी अपना कमाल दिखाते हुए को जमाने लगी है जो 50 सालों में 20वीं बार जमने लगी है।
पिछले 50 सालों के भीतर इस बार दिसंबर का महीना चौथी बार ऐसा बनता जा रहा है, जब सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ने की ओर कदम बढ़ाने आरंभ किए हैं। सर्दी भी इतनी भयानक कि अगर तापमान नापने वाले आंकड़ों पर एक नजर डालें तो आदमी उन्हें पढ़ते ही कांप उठेगा। जम्मू में रात का न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेंटीग्रेड तो श्रीनगर का शून्य से 5.4 डिग्री सेंटीग्रेड कम। चौंकाने वाली बात यह है कि लेह शहर में इसी महीने यह तापमान शून्य से 11.8 डिग्री सेंटीग्रेड नीचे पहुंच गया है।

हालांकि कश्मीर में बर्फबारी का आगमन हो चुका है लेकिन बाकी क्षेत्रों में अभी भी शुष्क सर्दी का प्रभाव है, जबकि लेह क्षेत्र भी अछूता नहीं है। मौसम में इन बदलाव की परिस्थितियों का परिणाम यह है कि श्रीनगर शहर में फिलहाल कई दिन तो सूरज ही नहीं चढ़ा है अर्थात् सूर्य देवता के दर्शन नहीं हो पा रहे थे। तापमान में आने वाली गिरावट सिर्फ सर्दी को ही प्रस्तुत नहीं कर रही बल्कि घाटी के लोगों के लिए कई परेशानियां तथा कठिनाइयां भी उत्पन्न कर रही हैं। भयानक सर्दी और ऐसे में न पानी की आपूर्ति, न कोयले की गर्मी और न ही बिजली के दर्शन। स्थिति ऐसी है, जैसी युद्ध के दौरान होती है।

जेहलम दरिया में पानी का स्तर कम हो गया है। बिजली की आपूर्ति इच्छा से आने और जाने वाली है।परिणामस्वरूप बिजली की अनियमित आपूर्ति न सिर्फ पानी की आपूर्ति को प्रभावित कर रही है बल्कि सर्दी के कारण जम चुकी पानी की टोटियों को गर्म करने लिए बिजली की आपूर्ति भी नहीं मिल पा रही है।

जम्मू में भयानक सर्दी का प्रकोप इतना नहीं मगर पानी तथा बिजली की आपूर्ति का प्रकोप बराबर ही है। देखा जाए तो इन दोनों की आपूर्ति का प्रकोप जम्मू क्षेत्र में कुछ ज्यादा ही है जहां लोग बराबर राजस्व भी भरते हैं लेकिन फिर भी चुकाए गए राजस्व के बराबर उन्हें पानी तथा बिजली की आूपर्ति नहीं हो पा रही है।

वैसे सर्दी की भयानकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि डल झील भी जमने लगी है। 50 सालों में यह 20वीं बार है कि डल झील भयानक सर्दी के कारण जमने लगी, जबकि लद्दाख तथा राज्य के अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित अन्य अनेकों झीलें भी भयानक सर्दी के कारण जम चुकी हैं।

दूसरी ओर जम्मू कश्मीर एक बार फिर पलायन से त्रस्त है, लेकिन इस बार का रोचक तथ्य इस पलायन के बारे में यह है कि इसके लिए आतंकवाद नहीं, बल्कि सर्दी जिम्मेदार है। राज्य से होने वाले इस नए पलायन में कश्मीर के लोग भयानक सर्दी से बचने के लिए न सिर्फ जम्मू के क्षेत्रों में शरण ले रहे हैं, बल्कि कई परिवार मुंबई और अन्य गर्म स्थानों की ओर भी परिवार सहित पलायन कर रहे हैं। अकेले मुंबई में ही करीब 1000 परिवारों ने पिछले एक पखवाड़े के दौरान शरण ली है।




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