US-India 2020 Summit में बोले PM मोदी- दुनिया को भारत पर भरोसा, 1.3 अरब भारतीयों का एक ही मिशन 'आत्मनिर्भर भारत'

पुनः संशोधित गुरुवार, 3 सितम्बर 2020 (23:02 IST)
नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने कोविड 19 वैश्विक महामारी में मानव केन्द्रित विकास की रणनीति पर बल दिया और कहा कि इस महामारी ने दुनिया को यह भी दिखाया है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के विकास का फैसला सिर्फ लागत के आधार पर नहीं बल्कि भरोसे पर भी आधारित होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि दुनिया को भारत पर भरोसा है। 1.3 अरब भारतीयों का एक ही मिशन है 'आत्मनिर्भर भारत'।
मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अमेरिका-भारत 2020 शिखर सम्मेलन (US-India 2020 Summit) में विशेष संबोधन दिया। गैर लाभकारी संगठन यूएस-इंडिया स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएस-आईएसपीएफ) द्वारा आयोजित इस 5 दिवसीय सम्मेलन की थीम 'अमेरिका-भारत के सामने मौजूद नई चुनौतियां' है।
मोदी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक महामारी का हर किसी पर असर पड़ा है और यह हमारी दृढ़ता, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था और अर्थव्यवस्था की परीक्षा ले रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात एक नई सोच की मांग करते हैं। ऐसी सोच जहां विकास की रणनीति मानव केन्द्रित हो। जहां हर किसी के बीच सहयोग की भावना हो।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश क्षमताओं के विस्तार, गरीबों की सुरक्षा और हमारे नागरिकों के भविष्य को बचाने पर ध्यान केन्द्रित कर रहा है। उन्होंने कोविड के खिलाफ लड़ाई के लिए सुविधाएं बढ़ाने और नागरिकों के बीच जागरूकता के प्रसार की दिशा में उठाए गए विभिन्न कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि त्वरित रूप से कदम उठाए जाने से सुनिश्चित हुआ कि 1.3 अरब जनसंख्या और सीमित संसाधनों वाले देश में प्रति 10 लाख आबादी पर मृत्यु दर दुनिया में सबसे कम बनी हुई है।
उन्होंने इस बात पर खुशी जाहिर की कि भारत का कारोबारी समुदाय, विशेष रूप से छोटे उपक्रम ज्यादा सक्रिय रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगभग शून्य से शुरुआत करते हुए उन्होंने हमें दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा पीपीई किट विनिर्माता बना दिया है।

विभिन्न सुधारों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि महामारी 1.3 अरब भारतीयों की आकांक्षाओं और महत्वाकांक्षाओं को प्रभावित करने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि हाल के दौर में देश में दूरगामी सुधार हुए हैं, जिससे कारोबार करना आसान हुआ है और लालफीताशाही कम हुई है।
मोदी ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े आवासीय कार्यक्रम पर सक्रिय रूप से काम चल रहा है और अक्षय ऊर्जा का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने रेल, सड़क और वायु संपर्क-मार्ग को मजबूत बनाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत एक राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के निर्माण के लिए एक विशेष डिजिटल मॉडल तैयार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि हम करोड़ों लोगों को बैंकिंग, कर्ज, डिजिटल भुगतान और बीमा उपलब्ध कराने के लिए सर्वश्रेष्ठ फिन-टेक (वित्तीय प्रौद्योगिकी) का उपयोग कर रहे हैं। इन सभी पहलों में विश्व स्तरीय तकनीक और वैश्विक स्तर की सर्वश्रेष्ठ प्रक्रियाओं का उपयोग किया जा रहा है।
मोदी ने कहा कि महामारी ने दुनिया को दिखाया है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के विकास का फैसला सिर्फ लागत के आधार पर नहीं लिया जाना चाहिए। वे भरोसे पर भी आधारित होने चाहिए। कंपनियां अब भौगोलिक क्षेत्र की सामर्थ्य के साथ ही विश्वसनीयता और नीतिगत स्थायित्व पर भी विचार कर रही हैं। भारत ऐसी जगह है, जहां ये सभी विशेषताएं हैं। उन्होंने कहा कि इन्हें देखते हुए भारत विदेशी निवेश के लिए अनुकूल स्थलों में से एक के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने कहा कि चाहे अमेरिका हो या खाड़ी देश, यूरोप हो या ऑस्ट्रेलिया- दुनिया हम पर विश्वास करती है। इस साल हमें 20 अरब डॉलर का विदेशी निवेश प्रवाह हासिल हुआ है। गूगल, अमेजन और मुबाडाला इन्वेस्टमेंट्स ने भारत के लिए दीर्घकालिक योजनाओं का ऐलान किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पारदर्शी और पूर्व अनुमानित कर व्यवस्था ईमानदार करदाताओं को समर्थन देती है और उन्हें प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहा कि भारत का जीएसटी एकीकृत है और पूरी तरह से अप्रत्यक्ष कर प्रणाली है।
मोदी ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता का उल्लेख किया जो पूरी वित्तीय प्रणाली के लिए जोखिम को कम करती है। उन्होंने व्यापक श्रम सुधारों पर भी बात की जो नियोक्ताओं के लिए अनुपालन का बोझ कम करते हैं और किस प्रकार ये कामगारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करते हैं।

उन्होंने विकास को गति देने में निवेश के महत्व पर चर्चा की और कहा कि भारत इसके मांग और आपूर्ति पक्ष दोनों पर किस प्रकार नज़र बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया के सबसे कम कर देने वाले देशों में से एक बनाकर और नई विनिर्माण इकाइयों को प्रोत्साहन देकर ऐसा किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने अनिवार्य ई-प्लेटफॉर्म आधारित 'फेसलेस असेसमेंट’ का उल्लेख किया और कहा कि ये करदाताओं के चार्टर के साथ-साथ नागरिकों की मदद करने में भी एक लंबी दूरी तय करेगा। बॉन्ड बाजार में जारी नियामकीय सुधारों से निवेशकों के लिए पहुंच में सुधार सुनिश्चित होगा।

उन्होंने कहा कि जब वैश्विक एफडीआई में एक प्रतिशत की गिरावट आई है तब भारत में एफडीआई 2019 में 20 प्रतिशत बढ़ा है। ये हमारी एफडीआई व्यवस्था की सफलता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि उपरोक्त सभी कदम देश के उज्ज्वल और ज्यादा समृद्ध भविष्य को सुनिश्चित करेंगे। ये एक मजबूत वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी योगदान देंगे।
मोदी ने आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए 1.3 अरब भारतीयों द्वारा अपनाए गए इस मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि 'आत्मनिर्भर भारत' स्थानीय (लोकल) को वैश्विक (ग्लोबल) के साथ मिलाता है और इससे एक ग्लोबल फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में भारत की ताकत सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य भारत का कायापलट करते हुए उसे महज एक निष्क्रिय बाजार रहने देने की बजाय ग्लोबल वैल्यू चेन्स के बीचोंबीच एक सक्रिय विनिर्माण हब में बदलना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे लिए आगे की राह अवसरों से भरी हुई है। खासतौर पर निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों में। उन्होंने कोयला, खनन, रेलवे, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को खोले जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कृषि में सुधारों के साथ-साथ मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा उपकरणों, फार्मा क्षेत्रों के लिए शुरू की गई उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन योजनाओं का भी जिक्र किया।
मोदी ने कहा कि भारत में चुनौतियों का सामना करने के लिए एक ऐसी सरकार मौजूद है जो नतीजे देने में विश्वास करती है, एक ऐसी सरकार जिसके लिए ईज़ ऑफ लिविंग (सुगम जीवनशैली) उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस (कारोबारी सुगमता)।

उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसे युवा देश के तौर पर किया जिसकी 65 प्रतिशत जनसंख्या की उम्र 35 वर्ष से कम है, जो आकांक्षाओं से भरा है और जिसने खुद को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां राजनीतिक स्थायित्व और नीतिगत निरंतरता है और जो लोकतंत्र और विविधता के लिए प्रतिबद्ध है। (वार्ता)



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