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Written By एन. पांडेय
Last Updated: गुरुवार, 1 दिसंबर 2022 (22:42 IST)

LAC: भारत-अमेरिकी सेनाओं के जबर्दस्त युद्धाभ्यास से चीन की बढ़ी टेंशन, दोनों आजमा रहे हैं वॉर गेमिंग के हर दांव

चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले की चीन सीमा के औली में 9,544 फीट की ऊंचाई पर एलएसी के विवादित बाड़ाहोती एरिया के करीब भारत और अमेरिकी सेनाओं के जबर्दस्त युद्धाभ्यास से चीन तक संदेश देने की कोशिश चीन की टेंशन बढ़ा रही है। दोनों सेनाएं वॉर गेमिंग के हर दांव को आजमा रही हैं।
 
औली करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर है और यहां से लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर है। पिछले कई सालों में चीनी सेना ने बाड़ाहोती एरिया में कई बार घुसपैठ की कोशिश की है, साथ ही एयर स्पेस का भी उल्लंघन किया है। चीन सीमा से बेहद करीब एलएसी का बाड़ाहोती इलाका एक डिमिलिट्राइज जोन है जिस पर भारत और चीन अपना अपना दावा करते आए हैं।
 
इस मिलिट्री ड्रिल में दोनों सेनाएं एक-दूसरे से युद्ध की कई टेक्निक भी साझा कर रहे हैं। जमीन से लेकर हवा तक दुश्मन को पस्त करने का अभ्यास इस दौरान दोनों देशों की सेनाएं करते दिखीं। इस युद्धाभ्यास में अत्याधुनिक हथियार से लेकर वॉर गेमिंग के हर दांव को आजमाया जा रहा है।
 
भारतीय सेना के मुताबिक युद्धाभ्यास के दौरान फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज, इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप, फोर्स मल्टीप्लायर्स, निगरानी ग्रिड की स्थापना और संचालन, ऑपरेशन लॉजिस्टिक और पर्वतीय युद्ध कौशल को शामिल किया गया है। प्राकृतिक आपदा से लेकर उग्रवादियों से निपटने के कौशल समेत बंधकों को छुड़ाने का भी अभ्यास किया गया है।
 
युद्धाभ्यास में अमेरिकी सेना की 11 एयरबॉर्न डिवीजन की सेकंड (2) ब्रिगेड हिस्सा ले रही है। इन अमेरिकी पैराट्रूपर्स को 'स्पार्टन्स' (स्पार्टा) के नाम से जाना जाता है। अमेरिकी सेना के अधिकारी ब्रैडी कैरोल ने कहा कि हम फ्लैश फ्लड और इसी तरह की स्थितियों के बारे में एक संयुक्त अभ्यास कर रहे हैं। यह भारतीय सेना और अमेरिकी सेना के बीच रक्षा सहायता मिशन और संबंधों को और मजबूत करने पर केंद्रित है।
 
एक्सरसाइज कमांडर ब्रिगेडियर पंकज वर्मा ने कहा कि औली में हो रही यह जॉइंट एक्सरसाइज युद्धाभ्यास का 18वां संस्करण है। इसमें हमने अमेरिकी सेना के साथ इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप की यूएन चार्टर के तहत यह युद्धाभ्यास किया। युद्धाभ्यास में भारतीय सेना की असम रेजीमेंट की एक पूरी बटालियन हिस्सा ले रही है। ये बटालियन फिलहाल सेना की लखनऊ स्थित मध्य कमान (सूर्या कमान) की एक इंडिपेंडेंट ब्रिगेड की अधीन है।
 
भारतीय सेना को हाई एल्टीट्यूड में लड़ाई लड़ने का अनुभव है। हाई एल्टीट्यूड में लड़ाई लड़ने, लॉजिस्टिक और मेडिकल की जो क्षमता भारतीय सेना के पास है, वह किसी भी दूसरे देश के पास नहीं हैं। उत्तराखंड से सटी एलएसी भारतीय सेना के सेंट्रल सेक्टर का हिस्सा है।
 
एलएसी का बाड़ाहोती इलाका भारत और चीन के बीच लंबे समय से विवादित रहा है। कुछ दशक पहले इसे दोनों देशों की सेनाओं ने डिमिलिट्राइज जोन घोषित किया था। इसका अर्थ था कि यहां हथियारों के साथ सैनिक नहीं जा सकते हैं। लेकिन गलवान घाटी की हिंसा और पिछले ढाई साल से पूरी एलएसी पर चल रहे तनाव के चलते यहां रूल ऑफ इंगेजमेंट बदल गए हैं और भारत कोई भी चूक नहीं होने देना चाहता। इस इलाके से सटे एरिया में भारतीय सेना और आईटीबीपी (ITBP) की सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है।
 
गलवान घाटी की हिंसा के बाद से बाड़ाहोती और उत्तराखंड से सटी पूरी एलएसी को सेना की लखनऊ स्थित मध्य कमान (सूर्या कमान) के अंतर्गत कर दिया गया था। उत्तराखंड से सटी करीब 750 किलोमीटर लंबी एलएसी पर बाड़ाहोती के अलावा नेपाल ट्राई-जंक्शन पर कालापानी-लिपुलेख का एरिया भी भारत और चीन के बीच विवाद का एक बड़ा कारण रहा है।
 
पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनातनी के बीच भी इस इलाके में चीन की सैन्य गतिविधियां बढ़ने की खबरें लगातार आती रहीं। चीनी सैनिकों ने यहां भारतीय चरवाहों की झोपड़ियां तक जला डाली थीं।
 
Edited by: Ravindra Gupta
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