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  4. OPINION : Why Narendra Modi is removing the symbols of slavery in the country
Written By Author विकास सिंह
Last Updated: शुक्रवार, 9 सितम्बर 2022 (14:45 IST)

नजरिया: देश में गुलामी के प्रतीकों को क्यों हटा रहे हैं नरेंद्र मोदी ?

देश से गुलामी के प्रतीकों को हटाना संघ के एजेंडे में सबसे उपर रहा है और आज नए भारत के निर्माण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस एजेंडे को धरातल पर उतार रहे है।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने गुरुवार को एक भव्य समारोह में इंडिया गेट के पास स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्‍य प्रतिमा का अनावरण रने के साथ कर्तव्‍य पथ का उद्घाटन किया। 2014 में केंद्र की सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार लगातार गुलामी के उन प्रतीको को हटा रही है जो देशवासियों को ब्रिटिश काल की याद दिलाते है। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप ही अंग्रेजी दासता की याद दिलाने वाली रेसकोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया था। इसके साथ देश की नई संसद का निर्माण भी गुलामी की प्रतीक से मुक्ति का ही अगला चरण है। 
 
देश को गुलामी से दासता की मुक्ति दिलाने के एजेंडे में ही पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय नौसेना को नया ध्वज सौंपा। नौसेना के नए ध्वज में अष्टकोणीय सीमाएं शिवाजी महाराज राजमुद्रा या छत्रपति शिवाजी महाराज की मुहर से प्रेरणा लेते हुए बनाई गई हैं। इसी साल 26 जनवरी को बीटिंग द रिट्रीट समारोह में स्कॉटिश कवि हेनरी फ्रांसिस लिटे की अबाइड विद मी धुन हटा कर कवि प्रदीप की 'ऐ मेरे वतन के लोगों को शामिल किया गया। वहीं देश को बजट को फरवरी के पहले दिन पेश करना भी ब्रिटिश काल से प्रेरित कर बनाई गई एक परंपरा को तोड़ना है। वहीं नरेंद्र मोदी की नेतृव वाली केंद्र सरकार अंग्रेजों के समय बनाए डेढ़ हजार से अधिक कानून को खत्म कर चुकी है।

राजपथ जिसके अब कर्तव्य पथ के नाम से जाना जाएगा का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा गुलामी का प्रतीक किंग्सवे यानि राजपथ आज से इतिहास की बात हो गया है और यह हमेशा के लिए मिट गया है। आज से कर्तव्य पथ के रूप में नए इतिहास का सृजन हुआ है। कर्तव्य पथ केवल एक मार्ग नहीं वरन भारत के समृद्ध लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि आज राजपथ कर्तव्यपथ बना है और जॉर्ज पंचम की मूर्ति को हटाकर नेताजी की मूर्ति लगी है, तो ये गुलामी की मानसिकता के परित्याग का उदाहरण नहीं है। यह ना तो शुरुआत है, ना ही अंत है। देश अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे सैकड़ों कानूनों को बदल चुका है। भारतीय बजट जो ब्रिटिश संसद के समय का अनुसरण कर रहा था, उसके समय और तारीख में तब्‍दीली कर दी गई है।

पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव में उपनिवेशवाद की बेड़ियों को तोड़कर देश को आज एक नई प्रेरणा और ऊर्जा मिली है। मौजूदा वक्‍त में हम कल को छोड़कर  आने वाले भविष्‍य की तस्वीर में नए रंग भर रहे हैं। आज हर तरफ जो नई आभा दिख रही है वो नए भारत के आत्मविश्वास की आभा है।

मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा कहते हैं कि आजादी के बाद देश में शासन करने वाली कांग्रेस की मानसिकता राजतंत्र वाली थी और कांग्रेस पार्टी का लोकतंत्र में कभी विश्वास नहीं। जबकि वैश्विक नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आम आवाम के लिए राजपथ नहीं लोकपथ और इसके लिए कर्तव्यपथ की सोच रखते है। राजपथ का नाम कर्तव्य पथ गुलामी के प्रतीको को हटाकर नए भारत के निर्माण की तरफ एक कदम है।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति को करीब से देखने वाले और ‘महानायक मोदी’ किताब के लेखक वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण मोहन झा कहते हैं कि देश मौजूद अंग्रेजों के गुलामी के प्रतीक को हटाकर दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संघ के एजेंडे को पूरा कर रहे है। देश से गुलामी के प्रतीकों को हटाना संघ के एजेंडे में सबसे उपर रहा है और आज नए भारत के निर्माण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस एजेंडे को धरातल पर उतार रहे है। मोदी सरकार देश में वर्ष 2020 में जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति लेकर आई वह भी नए भारत में गुलामी की मानसिकता के महिमामंडन को खत्म करती है।
 
देश में जिस तेजी से भाजपा सरकार गुलामी के प्रतीकों के अक्रांताओं की यादों और प्रतीको को हटाने के साथ नाम बदल रही है उससे एक बात तय है कि राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ नए भारत के निर्माण का दावा करने वाली भाजपा का लक्ष्य 2024 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रवाद के रथ पर सवार होकर केंद्र की सत्ता में एक बार से काबिज होना है। 
 
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