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Last Updated :नई दिल्ली , शनिवार, 22 नवंबर 2025 (13:23 IST)

ग्रेच्युटी, सेहत से लेकर सैलरी तक लेबर कोड की 10 खास बातें

labour code
Labour Code 2025 news in hindi : देश में शुक्रवार से केंद्र सरकार के 4 नए लेबर कोड देशभर में लागू हो गए हैं। इन कोड्स का सीधा असर देश के 40 करोड़ से अधिक कामगारों, कर्मचारियों और एंप्लायर्स पर पड़ेगा। ग्रेच्युटी, ईएसआईसी और सैलरी तक इन 10 बातों का क्या होगा आप पर असर...
 
सैलरी : नया लेबर कोड लागू होने से कर्मचारियों की सैलरी का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक सैलरी होगा। महिलाओं को पुरुषों के बराबर वेतन मिलेगा। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि कर्मचारियों को समय पर वेतन मिले। 
 
पीएफ और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ेगा : जब बेसिक सैलरी बढ़ेगी, तो कर्मचारी और कंपनी दोनों का ही पीएफ और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ जाएगा। इससे कर्मचारी को नौकरी छोड़ने के बाद अच्छा पैसा मिल सकेगा।
 
1 साल में ग्रेच्युटी :  नया लेबर कोड लागू होने से पहले तक कर्मचारी को 5 साल में ग्रेच्युटी मिलती थी। अब 5 साल की जगह सिर्फ 1 साल की नौकरी पर भी ग्रेच्युटी मिल सकती है। ALSO READ: नए लेबर कोड से कैसे बदलेगा कर्मचारियों का सैलरी स्ट्रक्चर?
 
छुट्टी और ओवरटाइम को लेकर बदले नियम : अब साल में 180 दिन काम करने के बाद ही कर्मी सालाना छुट्टी लेने का हकदार होगा। हर दिन 8 से 12 घंटे और हफ्ते में 48 घंटे काम होगा। ओवरटाइम करने पर दोगुने वेतन का प्रावधान किया गया है। 
 
फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को बड़ा फायदा : नए लेबर कोड में फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को स्थायी कर्मियों के बराबर वेतन, छुट्टी, चिकित्सा व सामाजिक सुरक्षा के साथ पांच वर्ष के बजाय सिर्फ एक साल बाद ग्रेच्युटी का हकदार बनाया गया है।
 
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सेहत पर ध्यान : इसमें 40 वर्ष के अधिक उम्र के श्रमिकों के लिए मुफ्त हेल्थ चेकअप का प्रावधान किया गया है। जिन संस्थानों में 10 से कम कर्मचारी काम करते हैं उन्हें भी ईएसआईसी का फायदा मिलेगा।
 
सुरक्षा समितियां : 500 से अधिक कामगारों वाली जगहों पर जरूरी सुरक्षा समितियां होंगी, जिससे जवाबदेही बेहतर होगी। छोटी यूनिट के लिए रेगुलेटरी बोझ कम होगा। ALSO READ: Labor Code : देश में 4 नए लेबर कोड लागू, समय पर सैलरी और मिनिमम वेतन देना होगा

शीघ्र समाधान पर जोर : लेबर कोड में विवाद के शीघ्र समाधान पर जोर है। इसमें दो सदस्यों वाले औद्योगिक न्यायाधिकरण होंगे और सुलह के बाद सीधे न्यायाधिकरण में जाने का विकल्प होगा। 

ये लोग भी नए लेबर कोड में शामिल : आडियो-विजुअल व डिजिटल मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकारों, डबिंग आर्टिस्ट, स्टंट पर्सन समेत डिजिटल और आडियो-विजुअल कामगारों को भी नए लेबर कोड का हिस्सा बनाया गया है।
 
गिग वर्क, प्लेटफार्म वर्क और एग्रीगेटर्स को किया परिभाषित : ‘प्लेटफार्म वर्क’ व ‘एग्रीगेटर्स’ को पहली बार लेबर कोड में परिभाषित करते हुए सभी गिग वर्कस को सामाजिक सुरक्षा देने का प्रविधान किया गया है। इसके लिए एग्रीगेटर्स को वार्षिक टर्नओवर का एक से दो प्रतिशत योगदान करना होगा। खदान मजदूरों समेत खतरनाक उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के साथ उनकी आन-साइट सेफ्टी मानिटरिंग के मानक तय किए गए हैं।
edited by : Nrapendra Gupta