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Last Modified: तेहरान/मॉस्को , बुधवार, 18 फ़रवरी 2026 (17:14 IST)

तीसरे विश्वयुद्ध की आहट? ईरान के साथ आए रूस-चीन, हॉर्मुज की खाड़ी में युद्धपोतों की तैनाती से मचा हड़कंप! शुरू किया घातक अभ्यास

Iran Russia China Alliance
Iran Russia China Alliance: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की तीन बड़ी ताकतों -ईरान, रूस और चीन- ने हॉर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) में अपना शक्ति प्रदर्शन शुरू कर दिया है। रूस और चीन ने अपने घातक जंगी जहाज ईरान के तट पर भेज दिए हैं, जहां वे त्रिपक्षीय नौसैनिक अभ्यास 'मैरीटाइम सिक्योरिटी बेल्ट 2026' (Maritime Security Belt 2026) में हिस्सा ले रहे हैं।

प्रमुख बिंदु : क्यों अहम है यह युद्धाभ्यास?

  • शक्ति प्रदर्शन : यह अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है।
  • रणनीतिक मार्ग : हॉर्मुज की खाड़ी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। यहां रूस-चीन की मौजूदगी वैश्विक राजनीति के बदलते समीकरणों को दर्शाती है।
  • रूसी भागीदारी : रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी निकोलाई पात्रुशेव ने पुष्टि की है कि मॉस्को 'समुद्रों पर बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था' बनाने के लिए इस अभ्यास में शामिल हो रहा है।

अमेरिका के लिए बड़ा संदेश

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और चीन के युद्धपोतों का ईरान पहुंचना सीधे तौर पर वॉशिंगटन को चुनौती है। जहां एक ओर अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपने विमान वाहक पोत तैनात किए हैं, वहीं दूसरी ओर चीन और रूस ने ईरान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का संकेत दिया है।

अभ्यास में कौन-कौन से जहाज शामिल?

  • रूस : बाल्टिक फ्लीट का कोर्वेट 'स्तोकिय' (Stoikiy) और अन्य सहायक जहाज।
  • चीन : पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट।
  • ईरान : IRGC नेवी के मिसाइल बोट्स, ड्रोन्स और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम। 
'ईरान के द्वीप और हॉर्मुज की खाड़ी अभेद्य किले हैं। यह अभ्यास समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है -रियर एडमिरल अलीरेजा तंगसिरी, IRGC नेवी प्रमुख

क्या है 'स्मार्ट कंट्रोल' मिशन?

ईरान ने इस त्रिपक्षीय अभ्यास के साथ-साथ अपना घरेलू अभ्यास 'स्मार्ट कंट्रोल ऑफ द हॉर्मुज Strait' भी शुरू किया है। इसमें लाइव-फायर मिसाइल टेस्ट और ड्रोन्स के जरिए समुद्री मार्ग की निगरानी का परीक्षण किया जा रहा है। इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा करना और समुद्री डकैती (Piracy) के खिलाफ समन्वय बढ़ाना बताया गया है।
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