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जम्मू-कश्मीर में राष्‍ट्रपति शासन से पहले क्यों लगता है राज्यपाल शासन, जानिए कारण...

Updated: बुधवार, 20 जून 2018 (08:54 IST)
नई दिल्ली। भारत के अन्य राज्यों में प्रदेश की सरकार के विफल रहने पर राष्ट्रपति शासन लागू होता है लेकिन जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल का शासन लगाया जाता है।
 
जम्मू-कश्मीर के संविधान की धारा 92 के तहत राज्य में छह माह के लिए राज्यपाल शासन लागू किया जाता है लेकिन ऐसा राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही हो सकता है। 
 
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भारत का संविधान जम्मू - कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करता है और यह देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जिसके पास अलग संविधान और नियम हैं।

राज्यपाल शासन के अंतर्गत राज्य विधानसभा या तो निलंबित रहती है या उसे भंग कर दिया जाता है। अगर छह माह के भीतर राज्य में सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो पाती है तो इस व्यवस्था की मियाद को बढ़ाया जा सकता है। 
 

हालांकि यह कोई पहला अवसर नहीं है कि राज्य में राज्यपाल शासन लागू हुआ है। बल्कि 21 साल पूर्व भी राज्य एक रिकॉर्ड राष्ट्रपति शासन के दौर से बाहर निकला था। असल में 1990 के आरंभ में तत्कालीन राज्यपाल जगमोहन ने फारूक सरकार को बर्खास्त कर राज्य में 19 जनवरी 1990 को राज्यपाल शासन लागू कर दिया था।
 
जानकारी के लिए राज्य में भारतीय संविधान की धारा 356 के तहत सीधे राष्ट्रपति शासन लागू नहीं किया जा सकता। अतः उसके स्थान पर राज्यपाल आप ही जम्मू कश्मीर के संविधान के अनुच्छेद 92 के तहत प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल कर राज्यपाल का शासन लागू कर सकते हैं। राज्य में प्रथम छमाही में इसे राज्यपाल का शासन कहा जाता है और बाद में इसे राष्ट्रपति शासन कहा जाता है।
 
1990 में लागू राष्ट्रपति शासन ने एक नया रिकॉर्ड बनाया था। तकरीबन पौने सात साल सालों तक यह राज्य में लागू रहा था। यह सिर्फ राज्य का ही नहीं बल्कि देश का भी अपने किस्म का नया रिकॉर्ड था कि इतनी लम्बी अवधि के लिए किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू रहा हो।
 

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