अंतरिक्ष में फिट होगी भारत की तीसरी आंख, कोरोनाकाल में ISRO ने रचा इतिहास

Last Updated: शनिवार, 7 नवंबर 2020 (17:38 IST)
श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश)। इंडियन स्‍पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (Indian Space Research Organisation)
ने कोरोना काल और अनलॉक के इस दौर की लॉन्चिंग के जरिए इतिहास रच दिया। ने 2020 का पहला लॉन्‍च कर दिया है।
श्रीहरिकोटा (Sriharikota) स्थित सतीश धवन स्‍पेस सेंटर से हुए लॉन्‍च में रॉकेट पीएसएलवी सी-49 ( PSLV C49)
भारत के अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (EOS01) के अतिरिक्त 9 विदेशी कमर्शियल सैटेलाइट भी साथ ले गया है।
सरो के 51वें मिशन की लॉन्‍चिंग के साथ संगठन 328 विदेशी सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजने में कामयाब रहा है।

ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी49/ईओएस-01) ने 26 घंटों की उल्टी गिनती के बाद अपराह्न तीन बजकर 12 मिनट पर यहां सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी। प्रक्षेपण के करीब 20 मिनट बाद यान ने सभी उपग्रहों को एक-एक कर कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया।

इसरो ने कहा कि प्रक्षेपण का समय पहले 3 बजकर दो मिनट तय किया गया था, लेकिन यान के मार्ग में मलबा होने की वजह से इसमें 10 मिनट की देरी की गई। यह इस साल भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का पहला मिशन है।
प्राइमरी सैटलाइट EOS01 एक रेडार इमेजिंग सैटेलाइट है। इसका एडवांस्‍ड रिसैट का सिंथैटिक अपरचर रेडार बादलों के पार देख सकने में सक्षम है। किसी भी मौसम में दिन या रात की बंदिश के बिना ये बादलों के पार देख सकता है। इससे देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होगी वहीं समुद्री सीमा की निगरानी पुख्ता तौर पर सुनिश्चित हो सकेगी। ये सैटेलाइट खेती, वानिकी और भूगर्भ शास्‍त्र के अध्यन में भी कारगर साबित होगी।

नौ विदेशी कमर्शियल सैटलाइट्स में लिथुआनिया का एक, लक्समबर्ग के चार और चार अमेरिकी सैटेलाइट भी हैं। सभी की कामयाब लॉन्चिंग से कोरोना काल में इसरो ने कामयाबी का नया इतिहास रच दिया।

पीएम ने दी शुभकामना : प्रधानमंत्री ने इसरो की इस सफलता पर बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने ट्‍वीट कर कहा कि मैं ISRO और भारत की स्पेस इंडस्ट्री को PSLV-C49/EOS-01 मिशन के सफल प्रक्षेपण के लिए बधाई देता हूं। हमारे वैज्ञानिकों ने COVID-19 के दौरान कई बाधाओं को पार करते हुए समय पर काम पूरा किया।



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