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अबकी बार महंगाई की पढ़ाई पर मार, स्टेशनरी, ट्रांसपोर्टेशन सहित फीस बढ़ने से छात्रों का बजट भी हुआ बेकाबू

Updated: बुधवार, 30 मार्च 2022 (14:26 IST)
नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल के रास्ते देश में महंगाई एक बार फिर तेजी से पैर पसारती दिखाई दे रही है। मार्च में महंगाई बढ़ने से आम आदमी का बजट गड़बड़ा गया है। अब उसके सबसे बड़ी चुनौती अप्रैल का सामना करना है। 1 अप्रैल से कई स्कूलों में नया शिक्षा का नया सत्र भी शुरू हो रहा है। इस वर्ष शिक्षा पर महंगाई का ट्रिपल अटैक होने जा रहा है। बच्चों को स्कूल आने जाने के लिए ज्यादा ट्रांसपोर्टेशन शुल्क देना होगा, स्टेशनरी के ज्यादा दाम चुकाने होंगे साथ ही कोरोना खत्म होने की वजह से ट्यूशन फीस नहीं बल्कि पूरी फीस चुकानी होगी।

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स्टेशनरी 15 से 25 प्रतिशत महंगी : कई राज्यों में अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू हो जाता है। इससे पहले मार्च में स्टेशनरी की कीमतों में 15 से 25 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। कॉपी, किताब, पेन, पेन्सिल जैसी आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ने से पैरेंट्स परेशान नजर आ रहे हैं। 
 
एक स्टेशनरी संचालक सुमित झा ने बताया कि इस वर्ष स्टेशनरी आइटम्स के दाम काफी तेजी से बढ़े हैं। कॉपियां 20 से 25 प्रतिशत बढ़ी है और किताबें भी 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गए। सभी चीजें महंगी हो गई।
 
झा ने बताया कि कोरोना काल में कागजों की कई मिले बंद हो गई इस वजह से भी बाजार पर बुरा असर पड़ा और कॉपी किताबों के दाम बढ़ गए। तेल के भाव बढ़ने से भाड़ा और बढ़ेगा जिससे दाम अभी और भी बढ़ने की आशंका है।
 
इसी तरह मध्यम वर्ग से ताल्लुक रखने वाले पेरेंट शिखा गुप्ता का कहना है कि वैसे ही कोरोना के कारण 2 साल बाद स्कूल खुले तो हमने चैन की सांस ली, लेकिन इस बार बच्चों की कॉपी, किताब और अन्य वस्तुओं के दामों ने हमें हैरान कर दिया।
 
फीस : फर्निचर, खिलौने, स्टेशनरी के दाम बढ़ने से प्ले स्कूलों से लेकर हायर सेकेंडरी स्कूल और कॉलेज तक सभी प्रभावित हुए हैं। कोरोना की वजह से पिछले 2 साल लोगों ने केवल ट्यूशन फी चुकाई थी, ऐसे में उन्हें फीस के मामले में काफी राहत मिली थी।
 
बहरहाल अब स्थितियां सामान्य हो चली है। ऐसे में इस बार बच्चों को पूरी फीस चुकानी होगी। शिक्षण संस्थानों पर भी बढ़ती महंगाई की वजह से फीस बढ़ाने का दबाव है। ऐसे में कई स्कूलों ने ट्यूशन फीस समेत अन्य फीस भी बढ़ा दी है।


ट्रांसपोर्टेशन : देश में चुनाव खत्म होने के बाद से पेट्रोल डीजल के दाम लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं। मात्र 9 दिन में दोनों ईंधनों के दाम 5.20 रुपए प्रति लीटर बढ़ गए। इसका स्कूल और कॉलेज दोनों के छात्रों पर पड़ेगा। जो छात्र बस से शिक्षण संस्थान तक का सफर करते हैं उन्हें पहले की अपेक्षा ज्यादा ट्रांसपोर्टेशन फीस चुकानी होगी वहीं गाड़ी से आने जाने वालों पर भी पेट्रोल के दाम बढ़ने की कीमत चुकानी होगी।

पढ़ाई के बढ़ते खर्च से परेशान भावेश ओझा ने बताया कि पढ़ाई पर इस बार महंगाई का ट्रिपल अटैक हुआ है। उन्होंने कहा कि बच्चे की स्कूल फीस में 4000 रुपए का इजाफा हुआ है। स्कूल वैन के 1200 के बजाए 1500 रुपए देने होंगे। किताबों और स्टेशनरी का बजट भी करीब 1000 रुपए बढ़ गया है।
लेखक के बारे में
नृपेंद्र गुप्ता
नृपेंद्र गुप्ता पिछले 21 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रिंट एवं डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य का अनुभव। वर्तमान में वेबदुनिया की न्यूज टीम में सहायक संपादक के रूप में कार्यरत हैं।   अनुभव : नृपेंद्र गुप्ता 2 दशक से ज्यादा समय से प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में कार्य.... और पढ़ें

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