अमेरिका में शून्य डॉलर से नीचे पहुंचे कच्चे तेल के दाम, क्या होगा भारत पर असर...

नृपेंद्र गुप्ता| पुनः संशोधित मंगलवार, 21 अप्रैल 2020 (13:20 IST)
नई दिल्ली। अमेरिका में सोमवार को कच्चे तेल के दाम अचानक शून्य डॉलर से नीचे चले गए। यह खबर पढ़कर में भी कई लोगों को पेट्रोलियम पदार्थों के दाम कम होने की उम्मीद जगी है। लेकिन, क्या भारत में ऐसा हो पाएगा? आइए जानते हैं अमेरिका में कच्चे तेल के दाम शून्य डॉलर से नीचे गिरने का भारत पर क्या असर होगा...
भारत नहीं खरीदता अमेरिका से तेल : मध्यप्रदेश पेट्रोलियम एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि कच्चे तेल के दामों में यह गिरावट अमेरिकी बाजारों में आई है, जबकि भारत अधिकांश तेल ओपेक से खरीदता है। ओपेक और रूस के बीच हुए समझौते की वजह से यहां तेल के दाम ज्यादा नहीं गिरे हैं। वतर्मान में हम 27 डॉलर प्रति बैरल के दाम पर खरीद रहे हैं और इसके 22 डॉलर प्रति बैरल से कम होने की संभावना नहीं है।
कोरोना से जंग : सिंह ने कहा कि भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम कम नहीं होने का दूसरा बड़ा कारण कोरोना से जंग है। कोरोना की वजह से भारत में 3 मई तक लॉकडाउन है। सभी वर्ग भारत सरकार की ओर से राहत की उम्मीद से देख रहे हैं। सरकार ने भी अपना खजाना खोल दिया है। कोरोना पर हो रहा खर्च अपने आप में बड़ा निवेश है। ऐसे में पेट्रोलियम पदार्थों पर राहत की उम्मीद करना बेमानी है।

उन्होंने कहा कि जब बांग्लादेश पाकिस्तान से अलग हुआ था तो भारत ने पड़ोसी देश की बड़ी मदद की थी। उस समय भी भारतवासियों पर टैक्स लगाया गया है।
क्या है तीसरा बड़ा कारण : अमीर हो या गरीब हर व्यक्ति अपने सामर्थ्य के अनुसार पेट्रोल-डीजल भराता है और अप्रत्यक्ष रूप से टैक्स भी चुका देता है। उसे इस टैक्स को चुकाने में कोई परेशानी नहीं होती। हर वर्ग पर टैक्स समान रूप से लगता है, इसमें किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होता।

लॉकडाउन के दौर में वैसे ही सड़कों पर गाड़ियां कम है। लेकिन जब बंद खुल जाएगा तो एक बार फिर सड़कों पर गाड़ियों का रेला नजर आएगा। कोरोना से जंग लंबे समय तक चलेगी, सभी को कोरोना से उबरने के लिए विशेष पैकेज की दरकार होगी। ऐसे में सरकार को भी इसके लिए धन की आवश्यकता होगी। उस स्थिति में पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्स से होने वाली आय देश के बड़े काम आएगी।
क्यों हुआ क्रूड का बुरा हाल : दरअसल, मई डिलीवरी के सौदे के लिए मंगलवार अंतिम दिन है और व्यापारियों को भुगतान करके डिलीवरी लेनी थी। लेकिन मांग नहीं होने और कच्चा तेल को रखने की समस्या के कारण कोई डिलीवरी लेना नहीं चाह रहा है। यहां तक कि जिनके पास कच्चा तेल है, वे पेशकश कर रहे हैं कि ग्राहक उनसे कच्चा तेल की डिलीवरी लें। साथ ही वे उसे प्रति बैरल 3.70 डॉलर की राशि भी देंगे। (इसी को कच्चे तेल की कीमत शून्य डॉलर/बैरल) से नीचे जाना कहते हैं।)



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