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Last Modified: नई दिल्ली , मंगलवार, 9 दिसंबर 2025 (08:36 IST)

इकरा हसन ने इस तरह समझाया वंदे मातरम का मतलब, वायरल हुआ बयान

ikra hasan
150 years of Vande Matram : लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर चर्चा के दौरान कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने हम बुलबुले हैं इसकी, ये हिंदुस्तान हमारा पंक्तियां पढ़ी। उन्होंने वंदे मातरम का अर्थ समझाते हुए मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। इस पर सत्ता पक्ष के कुछ सांसदों ने आपत्ति जताई। अब इकरा का बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ALSO READ: Vande Mataram Discussion : कांग्रेस ने वंदे मातरम् के साथ अन्याय किया, लोकसभा में बोले राजनाथ सिंह
 
इकरा ने वंदे मातरम् का अर्थ समझाते हुए सरकार पर हमला बोला और कहा कि आज हमें गीत के भाव का समझना जरूरी है। ये गीत देश की प्रकृति की वंदना करता है। उन्होंने कहा कि हम भारतीय मुसलमान इंडियन बाय च्वाइस हैं, बाय चांस नहीं। वंदे मातरम के किन छंदों का अपनाया जाए ये फैसला नेताजी सुभाष चंद्र बोस और गुरू रविंद्रनाथ टैगोर के परामर्श से हुआ था क्या अब हम उन महान नायकों की समझ पर सवाल उठाएंगे? 
 
सपा सांसद ने कहा कि उन महान हस्तियों में मातरम के उन छंदों को अपनाया जिन्होंने देश के सभी वर्गों को एक सूत्र में पिरोने का काम किया। आज हमें इस गीत के भाव को समझना आवश्यक है। ये गीत देश के जल, जंगल जमीन, हरियाली और निर्मल हवा की वंदना को समर्पित है, ये भारत के जन-जन की मंगल कामना करता है। भारत का हर नागरिक स्वस्थ रहे, सुरक्षित रहे और सम्मान के साथ जी सके। ALSO READ: Priyanka Gandhi ने कहा- आजादी के 75 साल बाद वंदे मातरम पर बहस क्यों, जरूरी मुद्दों से ध्यान हटाना चाहती है सरकार
 
सुजलाम सुफलाम का अर्थ है ऐसा देश जहां पर्याप्त जल हो, जहां नदियां जिंदा हों, बहती हों और जीवन देती हों लेकिन, अब यमुना का हाल देखिए.. दिल्ली प्रदूषण समिति 2025 की रिपोर्ट बताती है कि यमुना के कई हिस्सों में बीओडी स्तर 127 एमजी के स्तर पर पहुंच चुका है जबकि जीवित नदियों के लिए ये सिर्फ 3 एमजी प्रति लीटर होना चाहिए।
 
इकरा ने कहा कि 'मलयज शीतलाम्' में मलयज का अर्थ है मलय पर्वत से बहने वाली ठंडी सुगंधित हवा जो जीवन देती है बीमारी नहीं। उन्होंने सवाल किया कि क्या आज के भारत की हवा मलयज शीतलाम हैं। बस संसद के बाहर कदम रखिए एक गहरी सांस लीजिए ये हवा नहीं ये जहर है जो आपके हमारे फेफड़ों में उतर रहा है।
 
उन्होंने कहा कि हम वो देश हैं जो देश प्रकृति की वंदना तो करती है लेकिन उसकी प्रकृति की जंगल, हवा पेड़ को बचाने के वाले क़ानूनों को खुद ही खत्म कर रही है। अगर हम हवा को साफ नहीं कर पाए तो न सुजलाम बचेगा ना सुफलाम बचेगा। शस्य शामलाम का अर्थ है जहां जमीन उपजाऊ, खेत फसल से भरे हो किसान निराशा में न हो..आज किसान सिर्फ मौसम नहीं प्रदूषण, सिस्टम की नीतियों से मर रहा है।
 
सपा सांसद ने कहा कि आज वंदे मातरम् को बुनियाद बनाकर राजनीति की जा रही है लेकिन, जमीन पूंजीपतियों को सौंपी जा रही है। आदिवासियों को उनके घरों से हटाया जा रहा है। 'मातरम्' में सिर्फ मातृभूमि की वंदना नहीं इस धरती की हर नारी, बेटी और महिला के सम्मान की बात करता है। लेकिन आंकड़े आप देखेंगे तो देश में हर साल महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहा है। ALSO READ: वंदे मातरम के 150 वर्ष पर लोकसभा में चर्चा, कांग्रेस पर बरसे पीएम मोदी, क्यों याद आया आपातकाल?
 
उन्होंने कहा कि 1998 में यूपी में राष्ट्रगीत को अनिवार्य किए जाने के फैसले का उदाहरण देते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने उस कदम का विरोध किया था और संबंधित मंत्री को बर्खास्त भी किया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अटलजी भी तुष्टिकरण कर रहे थे या भारतीय नागरिकों की इच्छा का सम्मान कर रहे थे।
 
उन्होंने एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में महिला अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। उन्नाव कांड जैसी घटनाएं वंदे मातरम की आत्मा पर चोट पहुंचाती हैं।
edited by : Nrapendra Gupta 
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