इकरा ने वंदे मातरम् का अर्थ समझाते हुए सरकार पर हमला बोला और कहा कि आज हमें गीत के भाव का समझना जरूरी है। ये गीत देश की प्रकृति की वंदना करता है। उन्होंने कहा कि हम भारतीय मुसलमान इंडियन बाय च्वाइस हैं, बाय चांस नहीं। वंदे मातरम के किन छंदों का अपनाया जाए ये फैसला नेताजी सुभाष चंद्र बोस और गुरू रविंद्रनाथ टैगोर के परामर्श से हुआ था क्या अब हम उन महान नायकों की समझ पर सवाल उठाएंगे?
सुजलाम सुफलाम का अर्थ है ऐसा देश जहां पर्याप्त जल हो, जहां नदियां जिंदा हों, बहती हों और जीवन देती हों लेकिन, अब यमुना का हाल देखिए.. दिल्ली प्रदूषण समिति 2025 की रिपोर्ट बताती है कि यमुना के कई हिस्सों में बीओडी स्तर 127 एमजी के स्तर पर पहुंच चुका है जबकि जीवित नदियों के लिए ये सिर्फ 3 एमजी प्रति लीटर होना चाहिए।
इकरा ने कहा कि 'मलयज शीतलाम्' में मलयज का अर्थ है मलय पर्वत से बहने वाली ठंडी सुगंधित हवा जो जीवन देती है बीमारी नहीं। उन्होंने सवाल किया कि क्या आज के भारत की हवा मलयज शीतलाम हैं। बस संसद के बाहर कदम रखिए एक गहरी सांस लीजिए ये हवा नहीं ये जहर है जो आपके हमारे फेफड़ों में उतर रहा है।
उन्होंने कहा कि हम वो देश हैं जो देश प्रकृति की वंदना तो करती है लेकिन उसकी प्रकृति की जंगल, हवा पेड़ को बचाने के वाले क़ानूनों को खुद ही खत्म कर रही है। अगर हम हवा को साफ नहीं कर पाए तो न सुजलाम बचेगा ना सुफलाम बचेगा। शस्य शामलाम का अर्थ है जहां जमीन उपजाऊ, खेत फसल से भरे हो किसान निराशा में न हो..आज किसान सिर्फ मौसम नहीं प्रदूषण, सिस्टम की नीतियों से मर रहा है।
उन्होंने कहा कि 1998 में यूपी में राष्ट्रगीत को अनिवार्य किए जाने के फैसले का उदाहरण देते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने उस कदम का विरोध किया था और संबंधित मंत्री को बर्खास्त भी किया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अटलजी भी तुष्टिकरण कर रहे थे या भारतीय नागरिकों की इच्छा का सम्मान कर रहे थे।
उन्होंने एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में महिला अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। उन्नाव कांड जैसी घटनाएं वंदे मातरम की आत्मा पर चोट पहुंचाती हैं।
edited by : Nrapendra Gupta