संसद की सफलता आस्था पर निर्भर है : सुमित्रा

नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित सोमवार, 30 जून 2014 (21:42 IST)
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नई दिल्ली। ने सोमवार को कहा कि संसद की सफलता मुख्यत: संसद सदस्यों के कार्य निष्पादन, उनकी निष्ठा, प्रतिबद्धता तथा संसदीय संस्थाओं में उनकी आस्था पर निर्भर करती है।


सदन के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए सोमवार को यहां 2 दिवसीय का शुभारंभ करते हुए उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि निर्वाचित सदस्यों को जनप्रतिनिधि, विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों और एक विधायी निकाय के सदस्यों के रूप में विविध भूमिकाएं निभानी हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस सभा का समय बहुत सीमित होता है और यह आवश्यक है कि प्रत्येक सदस्य समय में अपने विचार स्पष्ट और सशक्त रूप से व्यक्त करने की कला में निपुणता हासिल करे।


इस बात पर उन्होंने दुख जताया कि सदस्य पीठासीन अधिकारियों द्वारा बार-बार चेताए जाने के बावजूद निर्धारित समय से अधिक समय तक बोलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि इसका बहुत ही खराब असर पड़ता है, विशेषरूप से इसलिए भी कि अब संसद की कार्रवाई का सीधा प्रसारण होता है।

संसदीय सौंध में 16वीं लोकसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के इस प्रबोधन कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि संसद की प्रतिष्ठा बहुत हद तक इसके सदस्यों के आचरण पर निर्भर है और यह सदस्यों और उनके मतदाताओं के हित में है कि वे सभा में अनुशासन और शालीनता बनाए रखने के अपने दायित्व को समझें।

प्रबोधन कार्यक्रम में सदस्यों को संबोधित करने वालों में अन्य वक्ताओं के अलावा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार, पूर्व केंद्रीय मंत्री ऑस्कर फर्नांडीस और राम नाईक शामिल हैं। (भाषा)



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