व्यापमं घोटाला : शिवराज के साथ संघ पर भी दाग

-स्मिता मिश्रा

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व्यापमं घोटाला में के अब तक सफल नेतृत्व में चल रही सरकार को लगा सबसे बड़ा झटका है। ऐतिहासिक हैटट्रिक लगाने के बाद सरकार खुद को चारों तरफ से घिरा हुआ महसूस कर रही है। लेकिन इस घोटाले का एक अहम पहलू यह भी है कि इस मामले में सरकार व पार्टी के साथ-साथ यानी संघ परिवार भी लपेटे में आ गया है।


पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के राज में एनडीए सरकार के दौरान पेट्रोल पंप घोटाला सामने आया था जिसमें संघ व पार्टी के करीबी लोगों को देशभर में पेट्रोल पंप आवंटित करने का आरोप लगा था, तब विरोधियों की धार कुंद करने के लिए वाजपेयी ने तमाम आवंटन एक झटके में रद्द कर डाले थे।

शायद उसके बाद भ्रष्टाचार का ये पहला मामला है जिसमें सीधे आरएसएस के बड़े नेताओं का नाम सामने आया है। कहने की ज़रूरत नहीं कि पहली दफा केंद्र में स्पष्ट बहुमत से भाजपा की सरकार बनने की ख़ुशी मना रहे संघ नेतृत्व के लिए यह विवाद मुंह का स्वाद कड़वा कर गया है।

लेकिन संघ मामले के इस स्तर तक पहुँचने के पीछे काफी हद तक प्रदेश नेतृत्व को भी ज़िम्मेदार मान रहा है। तीन दिन पहले नागपुर में जब सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी की आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व से मुलाक़ात हुई, तब यह महसूस किया गया कि समय रहते मामले को संभालने की कोशिश की जाती तो विवाद इतना तूल न पकड़ता।

मामला इस हद तक उछलने के पीछे संघ प्रदेश स्तर के कुछ नेताओं के बुरे इस्तेमाल करने को भी ज़िम्मेदार मान रहा है। आला सूत्रों ने बताया कि प्रदेश प्रमुख नरेन्द्र सिंह तोमर, संगठन मंत्री अरविन्द मेनन सहित बड़े नेताओं की यह ज़िम्मेदारी थी कि मामले के इस हद तक उछलने से पहले संघ को इससे आगाह किया जाता।

यह भी कहा गया कि प्रदेश प्रमुख और विशेष रूप से संगठन मंत्री की यह ज़िम्मेदारियों में शुमार है कि वह मामले को सुर्ख़ियों में आने से पहले हालात संभालें। एक वरिष्ठ अधिकारी ने अफ़सोस जताया कि मध्यप्रदेश में जैसे संगठन की हैसियत ही कमज़ोर पड़ गई है।
ध्यान रहे कि भाजपा में संगठन मंत्री की प्रमुख ज़िम्मेदारी पार्टी व आरएसएस में तालमेल बनाए रखना है। संघ ने इस बात को भी गंभीरता से लिया है कि केंद्र व प्रदेश के किसी भी नेता ने संघ के सुरेश सोनी और दिवंगत संघ प्रमुख केएस सुदर्शन का नाम आने पर खुलकर बयान देने या बचाव करने की ज़रूरत नहीं समझी।

आगामी 3 जुलाई से मध्यप्रदेश के ही धार में आरएसएस के प्रचारकों की विशेष बैठक है। यह बैठक हर साल संघ शिक्षा वर्ग संपन्न होने के बाद बुलाई जाती है। सूत्रों ने बताया कि धार की बैठक में व्यापमं घोटाले की बारीकियों, संघ नेताओं का नाम आने से विवाद और भावी रणनीति का मुद्दा उठेगा, इसके संकेत स्पष्ट हैं।



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