अस्पतालों में ध्वनि प्रदूषण में इजाफा

नई दिल्ली (भाषा)| भाषा|
बदलते वक्त और परिस्थितियों के कारण से है। बदलते परिदृश्य में एकास्टिक्स यानी ध्वनि अवशोषक तकनीकों की माँग बढ़ रही है।

अमेरिका के अग्रणी शोध संस्थान जान होपकिंस विश्वविद्यालय के एकास्टिकल इंजीनियरों ने एक अध्ययन में कहा कि गत पाँच दशकों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अस्पतालों में ध्वनि के स्तर में काफी बढ़ोतरी हुई है। इससे मरीजों एवं अस्पताल कर्मचारियों में तनाव बढ़ता है।

एकास्टिक्स एवं मिनी होम थियेटर कारोबार से जुड़ी एशिया की अग्रणी कंपनी एचकेएमटी के प्रबंध निदेशक डॉ. हिमांशु कुमार बताते हैं आज से पहले एकास्टिक्स कारोबार सिनेमाघरों, फिल्मों, थियेटरों, मल्टीप्लेक्सों तक ही सीमित था, लेकिन लोगों में स्वास्थ्य को लेकर बढ़ रही जागरूकता और समाज में हो रहे विकास से इसकी जरूरत अस्पतालों, होटलों एवं शिक्षण संस्थाओं में भी समझी जाने लगी है।
उन्होंने कहा कि किसी कमरे, भवन या जगह विशेष में ध्वनि के स्तर से जुड़ा शब्द एकास्टिक्स आम लोगों के लिए नया हो सकता है लेकिन आम लोगों को इस बारे में जागरूक करने की जरूरत है।

उनका कहना है कि बदलते वक्त और परिस्थितियों के कारण एकास्टिक्स की उपादेयता बढ़ रही है। देश में एकास्टिक्स के कुल कारोबार के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि यह अभी मल्टीप्लेक्सेस सिनेमाघरों, सभागारों तक ही सीमित है। आँकड़ों का जिक्र नहीं कर पाऊँगा लेकिन कल्पना कीजिए आने वाले समय में कितने अस्पतालों, स्कूलों, कार्यालय परिसरों में इसकी उपयोगिता होगी।



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