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550 वां प्रकाश पर्व : स्वर्ण मंदिर यानी गोल्डन टेम्पल के 5 रहस्य

Updated: मंगलवार, 12 नवंबर 2019 (14:02 IST)
भारत के सबसे प्रसिद्ध स्थलों में से एक अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के बाहरी परत पर चढ़े हुए सोने की चादर की वजह से इसे गोल्डन टेम्पल भी कहते हैं। इससे पहले मंदिर को दरबार साहिब या हरमंदिर साहिब के नाम से ही जाना जाता था। यहां दुनियाभर से लोग दर्शन करने आते हैं।
 
 
1.श्री अकाल तख्त साहिब : अकाल तख्त साहिब का मतलब है अनन्त सिंहासन। इस तख्त गुरुद्वारे की स्थापना अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में हुई थी। यह अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर का एक हिस्सा है। इसकी नींव सिखों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोविंद साहिब द्वारा 1609 में रखी गई थी। अकाल तख्त पांच तख्तों में सबसे पहला और पुराना है।
 
2.अमृत सरोवर : यहां एक सरोवर है जिसे 'अमृत सरोवर' कहा जाता है। श्रद्धालु इस मंदिर के दर्शन करने के पहले इसी सरोवर में अपने हाथ पैर धोकर मंदिर के अंदर प्रवेश करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस सरोवर में औषधीय गुण हैं।
 
 
3.सबसे बड़ी लंगर सेवा : दुनिया का सबसे बड़ा लंगर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में आयोजित होता है। कहते हैं यहां प्रतिदिन 2 लाख से अधिक रोटियां बनाई जाती है।
 
4.चार दरवाजें : नानकजी कहते हैं कि चाहे अमीर हो या गरीब, ऊंची जाति का हो या नीची जाति, अगर वह भूखा है तो उसे खाना जरूर खिलाओ। इसलिए स्वर्ण मंदिर में चार दरवाजे हैं। जो यही संदेश देते हैं कि व्यक्ति कोई भी हो, उनके लिए चारों दरवाजे खुले हैं।
 
 
5.अखंड पाठ : इस मंदिर में हमेशा जपुजी या गुरुग्रंथ साहिब का पाठ चलता ही रहता है। 

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें
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