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Nag Panchami 2020 : कालसर्प दोष के 13 लक्षण, 11 प्रयोग

रविवार,जुलाई 12, 2020
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नागपंचमी, सावन माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व आज शनिवार को हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण के दुर्लभ योग में है।
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मां मनसा देवी का जगत प्रसिद्ध और चमत्कारिक मंदिर हरिद्वार में गंगा किनारे हरकी पैड़ी के उधर पहाड़ी पर स्थित है। यह बहुत ही ऊंची पहाड़ी है इसलिए अधिकतर लोग यहां पर ट्राम के द्वार पहुंचते हैं। मनसा देवी माता के बारे में कई ऐसी बाते हैं जो विरोधाभासी ...
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भारत में प्राचीनकल से ही नाग पूजा का प्रचलन रहा है। श्रावण मास की नागपंचमी के दिन नाग पूजा और आराधना की जाती है। नाग से संबंधित कई बातें आज भारतीय संस्कृति, धर्म और परम्परा का हिस्सा बन गई हैं, जैसे नाग देवता, नागलोक, नागराजा-नागरानी, नाग मंदिर, ...
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भारत में नाग पूजा की परंपरा का प्रचलन प्राचीन काल से ही रहा है। भारत में नाग को देवता मानकर पूजा जाता है। सभी नागों को कश्यप ऋषि और कद्रू का पुत्र माना गया है। श्रावण मास में नागपंचमी का त्योहार नागों को ही समर्पित है। नाग से जुड़ी कुछ मान्यताएं ...
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नाग पंचमी का त्योहार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन नागों की पूजा प्रधान रूप से की जाती है। भगवान शिव के गले में जो नाग रहता है उसका नाम वासुकि है।
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नाग पंचमी, सावन माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व आज सोमवार को उत्तराफाल्गुनी हस्त नक्षत्र के दुर्लभ योग में है।
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उज्जैन में नागचंद्रेश्वर का मंदिर नागपंचमी के दिन ही खुलता है व सर्प उद्यान भी है। खरगोन में नागलवाड़ी क्षेत्र में नागपंचमी के दिन मेला व बड़े ही सुसज्जित तरीके से भंडारा होता है
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अग्नि पुराण में लगभग 80 प्रकार के नाग कुलों का वर्णन मिलता है, जिसमें अनन्त, वासुकी, पदम, महापद्म, तक्षक, कुलिक, कर्कोटक और शंखपाल यह प्रमुख माने गए हैं। स्कन्दपुराण, भविष्यपुराण तथा कर्मपुराण में भी इनका उल्लेख मिलता है।
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नागपंचमी से प्रत्येक माह की शुक्ल पंचमी को एक-एक नाग का विधान पूर्ण होता है। वे मंत्र निम्नलिखित हैं-
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नागपंचमी के दिन ही शिव मंदिर में 1 माला शिव गायत्री का जाप (यथाशक्ति) करें एवं नाग-नागिन का जोड़ा चढ़ाएं तो पूर्ण लाभ मिलेगा।
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भारत में नागों के अनेक मंदिर हैं, इन्हीं में से एक मंदिर है उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर का, यह उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है।
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पंचमी के दिन ही आस्तिक मुनि ने नागों की रक्षा की थी इसलिए पंचमी तिथि नागों को विशेष प्रिय है।
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यदि जन्म पत्रिका नहीं हो तथा जीवन में निम्नलिखित समस्याओं में से कोई एक भी हो तो वे अपने आपको कालसर्प दोष से पीड़ित समझें तथा नागपंचमी के दिन उपाय करें।
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नाग पंचमी के दिन नाग महाराज का पूजन करने से नाना प्रकार के कष्ट खत्म हो जाते हैं...नाग देवता की राशि अनुसार स्तुति कर सकते हैं -
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श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन नागपंचमी के पर्व को लोग बड़ी श्रद्धा और आस्‍था से मनाते आ रहे हैं। इस बार यह पर्व 5 अगस्त सोमवार के दिन आ रहा है।
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यदि जन्म पत्रिका नहीं हो तथा जीवन में निम्नलिखित समस्याओं में से कोई एक भी हो तो वे अपने आपको कालसर्प दोष से पीड़ित समझें तथा उपाय करें।
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नाग पंचमी के दिन नाग महाराज का पूजन करने से नाना प्रकार के कष्ट खत्म हो जाते हैं, इस दिन जिस व्यक्ति को राहु-केतु की दशा या महादशा चल रही हो,
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वह सर्प मनुष्य का रूप रखकर उसके घर आया और बोला कि 'मेरी बहन को भेज दो।' सबने कहा कि 'इसके तो कोई भाई नहीं था, तो वह बोला- मैं दूर के रिश्ते में इसका भाई हूं, बचपन में ही बाहर चला गया था। उसके विश्वास दिलाने पर घर के लोगों ने छोटी को उसके साथ भेज ...
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पुराणों में नागकुल के सैकड़ों नागों का उल्लेख मिलता है। ये सभी कश्यप ऋषि की पत्नी कद्रू से उत्पन्न हुए थे। उनके 8 प्रमुख पुत्र हैं- 1. अनंत (शेष), 2. वासुकि, 3. तक्षक, 4. कर्कोटक, 5. पद्म, 6. महापद्म, 7. शंख और 8. कुलिक। इसके अलावा धृतराष्ट्र और ...
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