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नागपंचमी पर घर के बाहर क्यों लिखें इस महान ऋषि का नाम, पढ़ें कथा

शनिवार,जुलाई 25, 2020
Nag Panchami festival 2020
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प्रतिवर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पूजा का विधान है। इस दिन को नागपंचमी के नाम से जाना जाता है। इस व्रत के साथ एक बार भोजन करने का नियम है।
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नागपंचमी की पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक सेठजी के सात पुत्र थे। सातों के विवाह हो चुके थे। सबसे छोटे पुत्र की पत्नी श्रेष्ठ चरित्र की विदूषी और सुशील थी, परंतु उसके भाई नहीं था।
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दोष-निवारण के लिए नाग देवता की राशि अनुसार स्तुति कर सकते हैं -
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नाग पंचमी का आरंभ नाग चतुर्थी से होता है और उसके बाद नाग पंचमी और नाग षष्ठी आती है। इस बार श्रावण शुक्ल पंचमी 25 जुलाई 2020 शनिवार को है, इस दिन नाग पंचमी मनाई जाएगी।
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नागपंचमी के दिन ही शिव मंदिर में 1 माला शिव गायत्री का जाप (यथाशक्ति) करें एवं नाग-नागिन का जोड़ा चढ़ाएं तो पूर्ण लाभ मिलेगा।
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नागपंचमी पर सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर सबसे पहले भगवान शंकर का ध्यान करें इसके बाद नाग-नागिन के जोड़े की प्रतिमा (सोने, चांदी या तांबे से निर्मित) के सामने यह मंत्र बोलें-
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धन की सुरक्षा हो या धन का आगमन बिना नागदेव की कृपा के संभव नहीं है। हमने कई किस्से कहानियां और उदाहरण देखें हैं जिनमें धन की सुरक्षा और खजाने की रखवाली में नागदेव तैनात हैं...यानी उनकी मर्जी के बिना हमारे जीवन में भी गुप्त धन और अचानक धन मिलने के ...
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जनमानस में नागपंचमी पर्व की विविध जनश्रुतियां और कथाएं प्रचलित है। नागपंचमी के संबंध में ऐसी ही दो बहुप्रचलित कथाएं हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं-
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भारतीय जनमानस में नाग से जुड़ीं कुछ मान्यताएं प्रचलित हैं, लेकिन इनमें कितनी सच्चाई है यह भी आज भी खोज का विषय बना हुआ है। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं नाग देवता से जुड़ी कुछ खास मान्यताएं-
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जिस जातक की कुंडली में कालसर्प योग होता है उसका जीवन पीड़ा से भर जाता है। उसे अनेक प्रकार की परेशानियां उठानी पड़ती हैं।
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इस बार कोरोना के कारण उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर देवता के दर्शन कीव्यवस्था में परिवर्तन किया गया है.. जो साल में सिर्फ एक दिन दर्शन देते हैं...लेकिन हम आपको बता रहे हैं उज्जैन में ही स्थित ऐसे नागचंद्रेश्वर देवता जो साल भर अपने दर्शन देते हैं।
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इस नागपंचमी पर बनाएं पारंपरिक शाही मीठा चूरमा। भगवान शिव और नागदेवता प्रसन्न होकर देंगे आशीष...
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नागपंचमी के दिन शिवजी को खीर का भोग लगाने से वे प्रसन्न होकर खुशहाल जीवन का आशीष देते हैं। पढ़ें सरल विधि...
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नाग पंचमी का त्योहार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन नागों की पूजा प्रधान रूप से की जाती है। भगवान शिव के गले में जो नाग रहता है उसका नाम वासुकि है।
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भारत में नागदेव के अनेक मंदिर हैं, इन्हीं में से एक मंदिर है उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर का, यह उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। इस बार कोरोना के प्रकोप के कारण नागचंद्रेश्वर मंदिर में नागपंचमी पर श्रद्धालु दर्शन के लिए ...
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नाग पंचमी की पूजा का एक प्रसंग भगवान श्री कृष्ण से जुड़ा हुआ है। बालकृष्ण जब अपने दोस्तों के साथ खेल रहे थे तो उन्हें मारने के लिए कंस ने कालिया नामक नाग को भेजा। पहले उसने गांव में आतंक मचाया। लोग भयभीत रहने लगे
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नाग देवताओं को समर्पित शुभ पर्व नाग पंचमी 25 जुलाई 2020 को मनाया जाएगा। नाग पंचमी के दिन नाग देवताओं की पूजा की जाती है।
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नागपंचमी, सावन माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व आज शनिवार को हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण के दुर्लभ योग में है।
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भारत में पाई जाने वाली नाग जातियों और नाग के बारे में बहुत ज्यादा विरोधाभास नहीं है। भारत में आज नाग, सपेरा या कालबेलियों की जाति निवास करती है। यह भी सभी कश्यप ऋषि की संतानें हैं। नाग और सर्प में भेद है। आओ जानते हैं नागों के अष्टकुल के बारे में ...
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